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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४१०

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प्रिय कानिटकर, ४३०. पत्र : जी० एन० कानिटकरको सत्याग्रह आश्रम साबरमती ३१ मई, १९२८ आपका पत्र मिला। मैं इस बातपर हैरान हूँ कि आपने जमनालालजीकी राय लिये बिना बैठककी तारीख निश्चित कर ली है और उसपर आप उनसे यह आशा करते हैं कि वह बैठकमें उपस्थित हों । निस्सन्देह उनके अध्यक्ष होनेके नाते आपके लिए इतना करना तो उपयुक्त ही था कि आप बैठककी तारीख और कार्य-सूचीके बारेमें पहले उनसे सलाह-मशविरा कर लेते और तब परिपत्र जारी करते । अब जमनालालजी कोई ऐसी दूसरी तारीख नियत करनेके लिए आपको तार भेज रहे हैं, जब वह निश्चय ही उपस्थित होंगे। जहाँ तक औषधालयका सम्बन्ध है मैंने आपको जो कुछ कहा वह इतना ही था कि यदि संघ-कौंसिल शर्तों आदिको स्वीकार कर लेगी तो राष्ट्रीय शिक्षण मण्डलको आवास भूमि पट्टेपर देनेमें कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। और यह तभी हो सकता है जब कि स्वावलम्बन पाठशालाके सम्पत्ति सम्बन्धी सारे अधिकार और चरखा संघ बिना शर्त हस्तान्तरित कर दिये जायें। श्रीयुत जी० एन० कानिटकर ३४१, सदाशिव पेठ पूना शहर अंग्रेजी (एस० एन० १३६१३) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, Gandhi Heritage Portal