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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४१५

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४३७. शिक्षा-विषयक प्रश्न- १ प्राथमिक शिक्षापर तीन लेख लिखनेके बाद, अब नीचेके प्रश्नोंके उत्तर देना सहज हो गया है । प्रश्न --- आपने एक बार लिखा था कि अंग्रेजीका भार हलका करें तो वह विद्यार्थी जीवनके कई वर्ष बचानेके बराबर होगा । राष्ट्रीय शिक्षणका अर्थ अगर राष्ट्रव्यापी शिक्षण करें तो आपके विचारानुसार इसका बोझा समाजपर कितना और कितने वर्षका होगा ? उत्तर-- पहले तो यह समझाना होगा कि अंग्रेजीका भार हलका करनेके क्या मानी हैं। मेरा मतलब यह बिलकुल नहीं है कि विद्यार्थीको अंग्रेजीका ज्ञान बिलकुल ही न दिया जाये । किन्तु जिस तरह कि कोई फ्रांसीसी अंग्रेजी जानता हो, उसी तरह हम उसका ज्ञान पर भाषाके रूपमें प्राप्त करें। अगर हम इसी हदतक अंग्रेजी जानें तो अंग्रेजीमें विचार करने, शुद्ध उच्चारणोंमें शुद्ध अंग्रेजी बोलने और शुद्ध अंग्रेजी लिखनेका बोझा न उठाना पड़े। मेरी मान्यता है कि इस बोझके कारण हर- एक विद्यार्थीका कमसे कम ५ वर्षका समय तो नष्ट होता ही है। इतना ही नहीं, बल्कि उन पाँच वर्षमें होनेवाले परिश्रमसे उसकी विचार-शक्ति मारी जाती है, शरीर निर्बल हो जाता है, और वह किसी स्याही सोखके समान केवल ऊपरी आकृतिकी नकल करनेवाला बन जाता है। अगर कोई आदमी पाँच वर्ष अपनी भाषाके जरिए ज्ञान लेनेमें खर्च करे तो कितना सीखेगा ? कितना बचायेगा ? अच्छेसे अच्छे विचार अपनी भाषाके जरिये जल्दी जान लेगा और पर भाषाके मुश्किल उच्चारण सीखनेके बोझके बच जायेगा । उत्तर- 11 प्रश्न -- एक ओर बाल-शिक्षा दूसरी ओर महाविद्यालयकी शिक्षा; दोनों ही बहुत खर्चीली हैं | क्या सचमुच राष्ट्रीय शिक्षणमें ये दोनों समाहित की जा सकती हैं ? अथवा कम खर्चमें उतनी ही ठोस शिक्षा देनेकी कोई योजना आपके पास है ? यह बतलानेका प्रयत्न मैंने पिछले तीन लेखोंमें किया है कि बालशिक्षा किस तरह सस्ती और स्वाश्रयी बनाई जा सकती है । अगर हम महाविद्यालयकी शिक्षाको, प्राथमिक शिक्षाको मदद पहुँचानेवाला रूप दें तो वह शिक्षा भी सस्ती हो जाये, और विद्यार्थी भलीभाँति राष्ट्रके लिए पोषक प्रकारका ज्ञान पाने लगें। 'उतनी ही ठोस शिक्षा' का अर्थ अगर सरकारी शिक्षा जैसी शिक्षा ही हो तो यह अप्रस्तुत प्रश्न है; क्योंकि सरकारी शिक्षाको मैं ठोस गिनता ही नहीं हूँ । राष्ट्रीय महाविद्यालयकी या प्राथमिक शालाओंकी शिक्षा सरकारी शालाओंकी शिक्षासे भिन्न और कितनी बार नई और मौलिक प्रकारकी होगी। इसलिए वह स्वतन्त्र रूपसे ठोस है । १. देखिए " प्राथमिक शिक्षा -१२, १३-५-१९२८ -२, २०-५-१९२८ -३, २७-५-१९२८ । Gandhi Heritage Portal