माईश्री वल्लभभाई, ४३८. पत्र : वल्लभभाई पटेलको । सत्याग्रह आश्रम साबरमती ३ जून, १९२८ इसके साथ गवर्नरको लिखे जवाबका मसविदा भेज रहा हूँ । संघर्ष अच्छा चल रहा है। चिरंजीवी होओ। मेरी जरूरत हो तो पत्र लिख देना या तार करना । तुम पकड़े जाओगे, यह अफवाह सुननेमें आती है। पकड़े गये तो कुछ आराम मिलेगा और न पकड़े गये तो हमने कभी हार न माननेकी सौगन्ध ली है न ? [ गुजरातीसे ] बापुना पत्रों : सरदार वल्लभभाई पटेलने बापू ४३९. पत्र : वसुमती पण्डितको साबरमती मौनवार [४ जून, १९२८] चि० वसुमती, तुम्हारे पत्र नियमित रूपसे मिलते रहते हैं । मेरे पत्रकी पहुँच तो लिखा करो। मैं तो नियमित रूपसे नहीं लिख पाता हूँ। यह सुबह चार बजे लिख रहा हूँ । अभी घंटी बजना शुरू हुआ है । अब भी अक्षरोंमें सुधारकी गुंजाइश है । तुम्हारा एक पत्र बह्नोंको पढ़कर सुनाया था। जहाँतक बन सके नौ बजेसे पहले सो जाना और चार बजे उठना । कसरत कर पाती हो ? खटमलोंके लिए कोई दवा काममें लाना । पूरी सफाईके बारेमें कोई सुझाव हो तो लिखना । गुजराती लड़कियाँ कितनी हैं ? इस समय रसोईमें ९० व्यक्ति जीमते हैं । अभी और शामिल होते जा रहे हैं । किन्तु यह सब तो दूसरे भी लिखते होंगे । गुजराती (सी० डब्ल्यू ० ४७६) की फोटो- नकलसे । सौजन्य : वसुमती पण्डित १. डाककी मुहरसे। ३६-२५ बापूके आशीर्वाद Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४१७
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