पत्र : विट्ठलभाई पटेलको ३८७ देशकै सब भागोंसे स्वयंसेवक भेजे जानेके प्रस्ताव आये हैं। और अगर अधिककी जरूरत हुई तो मुझे इसमें जरा भी शक नहीं है कि सारे देशमें स्वयंसेवक तैयार बैठे हैं। महाराष्ट्र, सिन्ध और दूसरे प्रान्तोंसे मित्रोंने मुझे सन्देश भेजे हैं कि वल्लभभाई इस बातका भरोसा रख सकते हैं कि उन्हें लगभग अनगिनत स्वयंसेवक मिल सकते हैं । इन शब्दोंमें जो आशावादिता व्यक्त हुई है, मुमकिन है, वह बहुत ज्यादा हो किन्तु उसमें उचित कमी करनेके बाद भी यह तो बेशक कहा जा सकता है कि अगर जरूरत पड़ी और माँग हुई तो पुरुष और स्त्रियां यथेष्ट संख्यामें सामने आयेंगे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ७-६-१९२८ चि० शान्तिकुमार, ४४२. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको मंगलवार [५ जून, १९२८ ] इसके साथ सुमन्तका पत्र है । अब क्या करूँ यह समझ नहीं आता । देखता कि इस आरोपका उत्तर जरूर देना चाहिए। यदि तुम कहो तो उसे यहां बुला लूं । किन्तु अच्छा तो यह होगा कि उसने विवेकको बिलकुल छोड़ न दिया हो तो तुम्हीं उसके साथ उसके पत्रके विषयमें बात करो । गुजराती (सी० डब्ल्यू० ४७०५) की फोटो - नकलसे । सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी माईश्री विट्ठलभाई, ४४३. पत्र : विट्ठलभाई पटेलको बापूके आशीर्वाद आश्रम बुधवार, ज्येष्ठ वदी ३, [६ जून, १९२८ ] स्वामीका पत्र मुझे मिल गया है। मुझे लगता है कि जो समिति नियुक्त की जायेगी यदि उसका निर्णय किसानोंके विरुद्ध जाता है तो उसके अनुसार उनको जो धन देना पड़ सकता है, उसे आज ही बैंकमें रखनेको शर्तको हम कबूल नहीं कर सकते। मैं देखता हूँ कि समितिके प्रति वल्लभभाई और किसानोंको अविश्वास है। अभी तो किसान इस बातपर लड़ रहे हैं कि लगानमें अनुचित वृद्धि की गई है । किन्तु जिस समितिके निर्णयसे बँधना उन्होंने स्वीकार किया है उसका निर्णय १. डाककी मुहरसे। २. साधन सूत्रमें ज्येष्ठ वदी ४ है पर बुधवार ज्येष्ठ वदी ३ को ही था । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४१९
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