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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४२१

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चि० वसुमती, ४४५. पत्र : वसुमती पण्डितको आश्रम बुधवार, ज्येष्ठ वदी [ ३, ६ जून, १९२८] ' तुम्हारे पत्र मिलते रहते हैं । इस समय तक मेरा पत्र भी मिल गया होगा । गंगाबहन और मणिबन बम्बई गई हैं। संयुक्त रसोईमें अब ९० से भी ज्यादा व्यक्ति जीमते हैं । लीलाबहन भी १५ दिनके लिए आई है। भाई चमनलाल भी वहीं भोजन करते हैं। काम तो अच्छा चल रहा है। बालकृष्ण आजकल यहीं है । छगनलाल और प्रभुदास कल आ गये हैं। भैंसका दूध और मुख्य रूपसे भैंसका घी आता है, इसलिए घीका त्याग करनेकी बात आश्रममें हो रही है । वहाँ पाखानोंकी कठिनाई दूर करनेका कोई आसान तरीका सोचकर बताना चाहिए। अन्ततः मिट्टीका उपयोग तो होना ही चाहिए। गुजराती (सी० डब्ल्यू ० ५७८) की फोटो नकलसे । सौजन्य : वसुमती पण्डित ४४६. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको भाईश्री घनश्यामदासजी, बापूके आशीर्वाद ६ जून, १९२८ आपका पत्र मीला है। आसनोंसे फायदा है ऐसा मैं भी मानता हूं । आसनोंकी पसंदगी में ज्ञानकी आवश्यकता है ऐसा मैंने देखा है । अगस्ट मासमें मैं आश्रममें ही हूंगा ऐसा अब तो लगता है । अवश्य आइये । आपका, श्रीयुत घनश्यामदास बिड़ला बिड़ला पार्क बालीगंज, कलकत्ता सी० डब्ल्यू० ६१५९ से । सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला १. डाककी मुहर से। साधन सूत्रमें ज्येष्ठ वदी ४ है पर बुधवार ज्येष्ठ वदी ३ को था। मोहनदास Gandhi Heritage Portal