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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४२२

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४४७. पत्र: चीमनलाल वोराको

ज्येष्ठ कृष्ण ३ [६ जून, १९२८][१]

भाई चीमनलालजी,

आपका पत्र मीला। पांच वस्तुका मतलब पांच ही है। दवामें भी दो पदार्थ आ जाय तो दो गीना जाय। नमक अलग पदार्थ में नहिं है। आजका मेरा खोराक बकरीका दूध, भाजी, घेउं, लींबु, बादाम है। हलंगी अलग गीनी जाती है। क्वीनीनके साथ कुछ और चीज भी लाई जाय तो दो वस्तु हो जायगी इ॰।

मेरा विश्वास है की जहां तक मनुष्य प्रयत्नको स्थान है यहां तक आयु बढ़ाना घटाना संभव है। आखरमें करनेवाला ईश्वर ही है परन्तु किसीको अपना निमित्त बना लेता है।

आपका,
मोहनदास गांधी

श्री चीमनलाल गुलाबचंद वोरा

श्रीमाली मोहल्ला

रतलाम

जी॰ एन॰ ६३०० की फोटो-नकलसे।

 

४४८. दोनों पहलू

अभी उस दिन ही मुझे उत्तरी खण्डके कमिश्नरके जिस पत्र की आलोचना करनेका दुःखद काम करना पड़ा था, बारडोली सत्याग्रह पर बम्बई सरकारकी विज्ञप्ति भी उसी पत्रकी श्रेणीकी है। इस विज्ञप्तिका आरम्भ इस अपमानजनक कथनको दुहराकर किया गया है कि श्रीयुत वल्लभभाई और उनके दूसरे साथी बाहरके लोग हैं। यहाँ उन्हें 'बाहरी' कहनेके बजाय बारडोलीमें न रहनेवाला कहा गया है। इसके बाद विज्ञप्तिमें बहुत बेहयाईसे इस तथ्यका उल्लेख किया गया है कि जब उनकी जब्ती करनेकी कोशिशें बेकार गई, तब सरकारने 'संगठित रूपसे भैंसें या दूसरी चल सम्पत्तिको जब्त करना शुरू किया।' श्रीयुत वल्लभभाईके प्रचार विभागने यह दिखा दिया है कि भैंसें जब्त करनेके क्या मानी होते हैं। इसके बाद विज्ञप्तिमें बड़े गर्व से कहा गया है कि जब्तीके काममें तथा जब्त किये गये मवेशियोंकी देखभालमें मामलतदारों और महालकारियोंकी मददके लिए चालीस पठान बुलाये गये हैं। प्रचार

  1. ↑ डाककी मुहरसे।