लेस्ली विल्सनको लिखे गये पत्रका मसविदा अन्तमें मैं आपसे ये दो प्रश्न पूछता हूँ : ३९७ क्या आप उत्तरी खण्डके अधिकारीके पत्रपर जिसकी ओर मैंने आपका ध्यान आकृष्ट किया था कोई विचार करना चाहते हैं या नहीं ? क्या आप उन आरोपोंकी जांच कराना चाहेंगे जिनकी ओर मैंने आपका ध्यान आकृष्ट किया है ? जिन बयानोंपर मुझे यकीन है और यदि जांच समितिकी नियुक्ति की जाये तो जिनकी पुष्टिमें काफी प्रमाण दिये जा सकते हैं, निम्नलिखित हैं : - १. कुर्कीके बहुतसे मामलोंमें पंचनामे तैयार नहीं किये गये, रसीदें नहीं दी गईं और कुर्क की गई सम्पत्तिका कोई हिसाब-किताब नहीं दिया गया । २. मालिकोंको पहचाने बिना ही भैंसोंकी कुर्की कर ली गई । ३. सिविल प्रोसीजर कोड ( दीवानी प्रक्रिया संहिता) के रखी गई सम्पत्ति भी कुर्क कर ली गई है। गया। ४. कुर्की रातके वक्त की गई । अधीन कुर्कीसे मुक्त ५. बाड़ोंको तोड़कर और दरवाजोंको उखाड़कर घरोंमें जबरदस्ती प्रवेश किया ६. दुधारू पशुओंको यातना पहुँचाई गई और उन्हें बहुत ही मामूली कीमत पर बेच दिया गया । रु० १२०० की भैंसे रु० २१६ पर बेच दी गईं। ७. एक पठान चोरी करता हुआ पकड़ा गया । ८. पठानोंने महिलाओंसे छेड़छाड़ की और उनके सामने भद्दी हरकतें कीं । ९. पठानोंने लोगोंकी भावनाओंको और भी कई तरहसे ठेस पहुँचाई । १०. कलक्टर या जिला अधीक्षक द्वारा मनमानी विज्ञप्तियाँ जारी की गई । ११. सत्याग्रहियोंके मुकदमोंकी कार्यवाही अनियमित ढंगसे चलाई गई । मुझे जो बहुतसे दृष्टान्त बताये गये थे मैंने उनमेंसे कुछ एक ही यहाँ दिये हैं । मुझे यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि यद्यपि मेरे पत्र बिलकुल मैत्रीपूर्ण हैं और इसलिए गोपनीय होने चाहिए, तो भी यदि आप समझते हों कि हमारा पत्र-व्यवहार प्रकाशित कर दिया जाये तो मेरी ओरसे इस बारेमें किसी तरहकी भी कोई आपत्ति नहीं है । परमश्रेष्ठ सर लेस्ली विल्सन बम्बईके राज्यपाल अंग्रेजी (एस० एन० ११४४७) की फोटो - नकलसे । 8941 Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४२९
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