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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४३०

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माईश्री विट्ठलभाई, ४५३. पत्र : विट्ठलभाई पटेलको सत्याग्रह आश्रम साबरमती ७ जून, १९२८ गवर्नरको भेजे जानेवाले जवाबका मसविदा इसके साथ है । उसमें कुछ फेरफार करनेकी जरूरत हो तो जरूर कर लेना । स्वामीने जो तैयार किया हो वह सब भेजने की जरूरत नहीं देखता । उसमें से कई बातें ली हैं । यह तो बहुत चाहता हूँ कि सारा पत्र-व्यवहार प्रकाशित हो जाये। किन्तु यह किस प्रकार हो ? गवर्नर अपने प्रत्येक पत्रके साथ अपने आपको अधिकाधिक बांधते प्रतीत होते हैं । गुजराती (एस० एन० १४४४१ ) की फोटो - नकलसे । मोहनदासके वन्देमातरम् ४५४. पत्र : महादेव देसाईको चि० महादेव, [७ जून, १९२८ के पश्चात् ] तुम्हारा तार मिला। मुझे जितना ठीक लगा उतना भाग मैंने ले लिया है। नम्रताका अभाव है, शेष भाग छोड़नेका यह तो सबसे छोटा कारण है। मुझे तो इस लेखकी शैली बिलकुल पसन्द नहीं आई । तुम जब जाओगे तो तुम्हारे सामने उसका विश्लेषण करूँगा । जिस दोषके कारण स्वामीका लेख रद्द किया था, लगभग वही दोष इस लेखमें भी है। इस लेखके विषयमें तुम्हारी कोई अलग धारणा या आशा हो तो वह मैं नहीं जानता इसलिए यदि मेरे अनुमानमें कुछ भूल हो तो वह हमें सहन करनी पड़ेगी । रामेश्वर बिड़लाका पत्र देखकर वल्लभभाई प्रसन्न होंगे । विट्ठलभाईको लिखा गया गवर्नरका पत्र भेज रहा हूँ और उसके साथ जवाब का मसविदा भी । बापूके आशीर्वाद १. गवर्नरको भेजे जानेवाले उत्तरके मसविदेके उल्लेखसे स्पष्ट है कि यह पत्र ७ जूनके बाद लिखा गया होगा। Gandhi Heritage Portal