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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४३४

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४०२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय आपके पत्रके कुमारी मेयोसे सम्बन्धित अंशको मैं 'यंग इंडिया "में उद्धृत कर रहा हूँ । आपका नाम उसमें नहीं दे रहा हूँ । श्री एन्ड्रयूज आजकल कोलम्बोमें हैं और कविकी सेवा कर रहे हैं, जिन्हें अचानक बीमार पड़ जानेसे यूरोप जाते हुए बीचमें रुकना पड़ा । श्रीमती रचेल एम० स्टर आयरसन लेन विन्केन्टन समरसेट, इंग्लैंड अंग्रेजी (एस० एन० १४३२३ ) की फोटो नकलसे । ४६०. पत्र : रामेश्वरदास पोद्दारको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती भाई रामेश्वरदास, ८ जून, १९२८ तुम्हारा पत्र जमनालालजीने मुझे भेज दिया है। मैं तुम्हें क्या लिखूं ? तुम धीरज न छोड़ो, स्वस्थ रहो और शक्तिसे अधिक कोई भी काम करनेकी इच्छा न करो। शंकरराव देव जैसे साधु पुरुष वहाँ हैं, उनसे पूछकर चलो; या वर्षामें रहो तो जैसा जाजूजी' कहें वैसा करो । गुजराती (जी० एन० १९५) की फोटो नकलसे । बापूके आशीर्वाद ४६१. पत्र : वसुमती पण्डितको ९ जून, १९२८ चि० वसुमती, तुम्हारे पत्र मिलते रहते हैं । यदि पाखानेका दूसरा कोई प्रबन्ध न हो सके और एनिमा लेनेमें मुश्किल हो तो कमोड रख लो और उसे अपने हाथसे ही साफ कर लिया करो । विलायती कमोड लेनेके बदले, वहींसे ले लेना ज्यादा आसान होगा । १. देखिए यंग इंडिया, २८-६-१९२८ में प्रकाशित लेख " एन इम्पटिनेंस " । २. श्रीकृष्णदास जाजू । Gandhi Heritage Portal