पत्र : तैयब अलीको ४०३ देहरादूनके बहुत से घरोंमें कमोड इस्तेमाल करनेका रिवाज है । जो भी सुधार प्रेम- पूर्वक हो सके वह करवाना । चि० कमलाने तुम्हारा सन्दूक नहीं खोला। तुम्हारा सन्दूक गंगाबहनने किसी कामसे खोला था । उसी समय उसमें थाली है या नहीं यह देखनेके लिए प्रभावती से कहा था । सन्दूक खोलनेका काम गंगाबह्नने प्रभावतीको सौंपा था। इसमें दुःख माननेका मुझे कोई कारण नहीं दिखाई देता । कमलाने सन्दूक खोलकर नहीं देखा । उसने यही कहा है और प्रभावतीसे तसदीक करा लेनेको कहा है। मेरा भी विचार प्रभावतीसे पूछ लेनेका है। किन्तु मुझे नहीं लगता कि कमलाने कोई बात छिपाई है । तुम्हारे सन्तोषके लिए प्रभावतीसे भी पूछूंगा । यहाँका काम जमता जा रहा है। इस समय सवेरेके तीन बजे हैं [ पुनश्चः ] हिन्दी खूब सुधार लो । गुजराती (सी० डब्ल्यू० ४७७) की फोटो - नकलसे । सौजन्य : वसुमती पण्डित ४६२. पत्र : तैयब अलीको बापूके आशीर्वाद आश्रम साबरमती ९ जून, १९२८ भाईश्री तैयब अली, आपका पत्र मिला । अपनी टेकपर कायम रहनेके लिए आपने नौकरी छोड़ दी, इसके लिए आपको धन्यवाद देता हूँ । नवजीवन' में खादीपर समय-समयपर लिखा ही जाता है, किन्तु एक-एक कामको लेकर अलगसे लिखें यह योग्य नहीं लगता । सम्बन्धियोंकी निन्दा सहन करें। इस समय आपने कौन-सा धन्धा तलाश किया है ? गुजराती (सी० डब्ल्यू० ७७५८ ) से । सौजन्य : लालचन्द जयचन्द वोरा मोहनदास गांधीके वन्देमातरम् Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४३५
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