सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४३६

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

प्रिय भगिनी, ४६३. पत्र : हेमप्रभादेवी दासगुप्तको आश्रम ९ जून, १९२८ आपका खत मिल गया । निखिल सोदेपुरमें आ गया इससे एक दृष्टिसे मुझे अच्छा लगता है । मेरा कुछ विश्वास है कि दूधसे, कटीस्नानसे और स्वच्छ हवासे और आरामसे उसको ठीक हो जायगा । कैसा भी हो हरगीज़ चिंता न करें। ईश्वरने दीया है और जब चाहे तब ईश्वर ले जा सकता है। तारिणीके हाल कैसे है। जो दूसरे रोगी है उनको अगर क्षयकी व्याधि है तो और उसके पास ईतना धन है तो पहाड़ पर भेज देना चाहिये । जी० एन० १६५७ की फोटो नकलसे । ४६४. पत्र : केदारनाथ बनर्जीको बापूके आशीर्वाद प्रिय मित्र, [९ जून, १९२८के पश्चात् ] आपका पत्र मिला । मुझे इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि पिताजीको कुछ अस्थायी दुःख हो तो भी आपको उन्हें छोड़कर ऐसी जगह चले जाना चाहिए जहाँ आप अपने सम्बन्धियोंकी मदद करने योग्य अच्छी आजीविका कमा सकें । केदारनाथ बनर्जी नया गंज कानपुर अंग्रेजी (एस० एन० १४०५६) की माइक्रोफिल्म से । हृदयसे आपका, १. यह पत्र केदारनाथ बनर्जीके ९-६-१९२८ के पत्रके उत्तरमें लिखा गया था। Gandhi Heritage Portal