४०६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय प्रश्न: आप क्या मानते हैं कि शिक्षकोंकी धार्मिक शिक्षा, अपनी दृष्टिके अनुसार जैसी पसन्द हो वैसी देनेका हक है ? उत्तर : एक तन्त्रमें रहनेवाले शिक्षकोंको खास अपनी-अपनी दृष्टिके अनुसार धार्मिक शिक्षा देनेका हक हो ही नहीं सकता। दूसरे विषयोंकी तरह जो रूपरेखा संचालकोंने धार्मिक शिक्षाकी बनाई हो, उसीको आधार मानकर धार्मिक शिक्षा दी जा सकती । इस रूपरेखाके अनुसार धार्मिक शिक्षा देनेका तरीका प्रत्येक शिक्षकका अपना ही होगा, किन्तु धर्मके विषय में संचालकोंने जो आदर्श बनाया होगा, शिक्षा उसीके अनुसार दी जा सकती है। इतना सच है कि कुछ विशेष पुस्तकोंको पढ़ लेनेवाला जिस तरह अमुक विषयोंकी शिक्षा दे सकता है, उस तरह धार्मिक शिक्षा पुस्तकके द्वारा दी ही नहीं जाती । इस शिक्षाको देनेकी रीति और दूसरी शिक्षाओंसे भिन्न है । जब दूसरी शिक्षा बुद्धिके द्वारा दी जाती है, तब धार्मिक शिक्षा केवल हृदयके द्वारा ही दी जा सकती है। इसलिए जबतक शिक्षक धर्ममय न हो, तबतक वह धर्मकी शिक्षा न दे। किन्तु यों धार्मिक शिक्षा देनेका वाहन जुदा होनेपर भी उक्त शिक्षा देनेके बारेमें विशेष जानकारी होनेकी आवश्यकता है ही। जैसे कि जहाँपर अहिंसाको परम धर्म माना हो वहाँपर हिंसाका उत्तेजन देनेवाली शिक्षा नहीं दी जा सकती अथवा जहाँ सभी धर्मोके प्रति प्रेम, उदारता, सहिष्णुता रखनेका आदर्श स्वीकार किया गया हो, वहाँ धर्मोके विरोधकी शिक्षा नहीं दी जा सकती। थोड़ेमें, जहाँ धार्मिक शिक्षा देनेकी आवश्यकता स्वीकार की गई है, वहाँ उसके बारेमें अराजकताको स्थान नहीं होना चाहिए । [ गुजरातीसे ] नवजीवन, १०-६-१९२८ ४६६. बारडोली यज्ञ बारडोलीमें चलनेवाला सत्याग्रह एक तरहका यज्ञ ही है । पारमार्थिक कार्यमात्र यज्ञ कहलाता है। बारडोलीके किसान व्यक्तिगत स्वार्थके लिए नहीं किन्तु सामाजिक लाभके लिए, स्वाभिमानके लिए लड़ रहे हैं। इसलिए यह यज्ञ है । आहुति भी उसमें रोज पड़ रही है । अन्तिम आहुतिकी खबर अभी अभी आई है। वह इस प्रकार है : सरकारकी विज्ञप्तिका यह करारा जवाब गिना जायेगा । पटेलों और तलाटियोंने इस प्रकार जो वीरता दिखलाई है, मैं उसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि वे इस निश्चयसे डिगेंगे नहीं, और न उसके लिए कभी पछतायेंगे ही। सरकारी नौकरीका मोह टूटना बहुत जरूरी है। जिसके हाथ-पैर मजबूत हैं और जो उद्यमी हैं, उसके लिए ईमानदारीसे रोटी कमानेमें कहीं मुश्किल नहीं होती । १. यहाँ नहीं दिया जा रहा है। इसके अनुसार ४० पटेलों और आठ तलाटियोंने सरकारी नीतिकी अराजकताके प्रति विरोध व्यक्त करनेके लिए इस्तीफे दे दिये थे और परिणामस्वरूप सरकारने और भी दमन करने की धमकी दी थी। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४३८
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