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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४४०

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४०८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय उसके वचनोंसे भ्रममें क्या पड़ना और क्या लालच में पड़ना ? समझौता होना होगा तो सरदार चेतावनी देगा ही । चुपचाप लगान भरनेवालोंकी बातसे भुलावेमें पड़नेकी जरूरत नहीं है। हरएक कौममें कुछ निर्बल व्यक्ति तो होते ही हैं। मेरा अनुभव यह है कि डरके मारे चुपचाप दबाव मान लेनेवाले कम होते हैं, किन्तु उनकी संख्या ज्यादा बताई जाती है, इसलिए सत्याग्रहीको चोरी-छिपे लगान मरनेकी बात न मानना ही शोभा देगा । वह माने कि मुझमें जो शक्ति है, वह दूसरेमें भी हो सकती है। किन्तु अन्तमें चोरी- छिपे हुक्म मान लेनेवाले निकल भी आयें तो आप निराश न हों। धर्म तो उसका है, जो उसे पालता है । [ गुजरातीसे ] हरिनो मारग छे शूरानो, नहि कायरनुं काम जोने नवजीवन, १०-६-१९२८ ४६७. बारडोली-दिवस १२ जूनका दिन बारडोलीके सत्याग्रहियोंसे सहानुभूति प्रकट करनेके लिए और उनको अन्य प्रकारकी सहायता देनेके लिए नियत किया गया है। हम इस दिनको किस तरह मनायें ? सत्याग्रहकी सभी लड़ाइयाँ आत्मशुद्धिकी लड़ाइयाँ होती हैं । सत्याग्रही अपने सत्यकी विजय अपनी शुद्धिसे, अपनी तपस्यासे प्राप्त करनेका प्रयत्न करता है और इसी प्रयत्नमें विश्वास रखता है। इसलिए १२ जूनको हम जितने शुद्ध हो सकें हमें उतना शुद्ध होना चाहिए और हमें ईश्वरसे प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें, सत्यकी इस जयमें जितने भी दुख आयें उनको सहन करनेकी शक्ति दे। यह सहायता प्रथम कोटिकी सहायता है । बारडोली गुजरातमें है इसलिए बारडोलीके प्रति अन्य प्रान्तोंकी अपेक्षा गुजरातका कर्त्तव्य कुछ अधिक है, गुजरात ऐसा समझकर १२ जूनको आत्मशुद्धिका यज्ञ करे। यदि सम्भव हो तो सभी जगह उस दिन लोग स्वेच्छासे अपना सामान्य कामकाज अथवा आजीविकाका धन्धा बन्द रखें और बारडोलीकी लड़ाईमें सहायता देनेके लिए धन संग्रह करें : वे शामके वक्त बड़ी-बड़ी सभाएँ करें और उनमें इस लड़ाईके प्रति सहानुभूति सूचक और सरकारकी अराजकताके प्रति रोषसूचक प्रस्ताव पास करें और दिनमें जिन लोगोंसे चन्दा लेना रह गया हो वे यदि सभामें आये हों तो उनसे चन्दा लें । [ गुजरातीसे ] नवजीवन १०-६-१९२८ Gandhi Heritage Portal