४१२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय हो सकता है कि मैं तुम्हारी माँग पूरी न कर सकूँ पर कमसे कम मुझे ना कहनेका मौका तो मिलना ही चाहिए। हिन्दू-मुस्लिम सवालको भूल जाइए। इसमें विशेषज्ञोंको सिर खपाने दें। श्रीयुत ना० २० मलकानी केन्द्रीय बाढ़ सहायता समिति हैदराबाद, सिन्ध अंग्रेजी (एस० एन० १३४१०) की माइक्रोफिल्मसे । प्रिय जनकधारी बाबू, ४७१. पत्र : जनकधारी प्रसादको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती १० जून, १९२८ आपका पत्र मिला । 'श्रम' शब्दमें सेवाकार्य, जैसा कि आप कर रहे हैं, का समावेश हो जाता है। पर कला, साहित्य तथा आमोद-प्रमोदके कार्य-कलापोंका समावेश इसमें नहीं हो सकता । मुझे लगता है कि आपका इशारा विन्ध्येश्वरी बाबूके बड़े पुत्रकी ओर है। मुझे गलती हो जानेका दुख है । निश्चय ही आपकी पत्नीके सम्बन्धमें मैं किसी दिक्कतकी आशंका नहीं करता । अंग्रेजी (जी० एन० ५२) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, मो० क० गांधी १. जनकधारी प्रसादने अपने पत्रमें पूछा था : इसका प्रयोग शारीरिक श्रम करनेवालोंके लिए करते हैं सम्बन्धी तथा सौन्दर्य शास्त्रके कार्य-कलापोंको स्थान है ? ईमानदार श्रमिक' का क्या अर्थ है। क्या आप या विस्तृत अर्थ में। क्या इसमें साहित्यिक, कला २. जनकधारी प्रसादने लिखा था : पत्नीको आश्रम भेजनेका विचार करनेसे पहले में आपको अवश्य लिखूँगा । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४४४
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