४५५ा ४१७ भाषण: गुजरात विद्यापीठके विद्यार्थियोंके समक्ष अंग्रेजीके जरिये ज्ञान दिया जाता है, इससे जनताका कितना नुकसान होता है। हमने धर्म छोड़ दिया, कर्म छोड़ दिया, इसका यह एक उदाहरण है । दूसरा उदाहरण अर्थशास्त्रका है । वहाँ जो अर्थशास्त्र पढ़ाया जाता है, वह गलत है। आप जिज्ञासु होंगे तो देखेंगे कि जर्मन, अमेरिकी या फ्रेंच भाषामें जो अर्थशास्त्र पढ़ाया जाता है, वह अलग-अलग होता है । मेरे पास हंगरीका एक आदमी आया था। वह जो बात कहता था उससे मुझे लगा कि वहाँका अर्थशास्त्र दूसरा ही होना चाहिए। हर देशकी स्थिति के आधार पर वहाँका अर्थशास्त्र तैयार किया जाता है । यह मानना ठीक नहीं कि एक देशका अर्थशास्त्र सारी दुनियाके लिए सच्चा है । आज जो अर्थशास्त्र पढ़ाया जाता है, वह हिन्दुस्तानको पामाल कर रहा है । हमें हिन्दुस्तान के अर्थशास्त्रका पता ही नहीं, हमें तो उसकी खोज करनी है। यही बात इतिहासकी है। अध्यापकोंको सोचना चाहिए कि हिन्दुस्तानका इतिहास क्या हो सकता है। कोई फ्रान्सका आदमी हिन्दुस्तानका इतिहास लिखेगा तो एक तरह लिखेगा, अंग्रेज दूसरी तरह लिखेगा । हिन्दुस्तानका आदमी मूल लेखोंको ढूँढ़ कर हिन्दुस्तान के वातावरणको देखकर लिखेगा, तो जरूर दूसरा इतिहास लिखा जायेगा । फांसीसियों और अंग्रेजोंकी लड़ाईके अंग्रेजोंके लिखे हुए हालको क्या तुम वेद- वाक्य मानते हो ? जिसने लिखा होगा उसने ठीक लिखा होगा ? फिर भी उसने अपने दृष्टिकोणसे लिखा है । वह उसी किस्मकी घटनाएँ बयान करेगा जिनमें अंग्रेजोंकी जीत हुई हो। हम भी ऐसा ही करेंगे। फ्रांसीसी भी ऐसा ही करेंगे। हम हिन्दुस्तानका अलग ही इतिहास लिखेंगे। महाभारतका अर्थ भी अंग्रेज विद्वान एक तरह करेगा, हिन्दुस्तानी विद्वान दूसरी तरह करेगा और अगर वह दिलमें गहराई से सोचकर करे, तो उससे भी दूसरे ही ढंग से करेगा । विन्सेंट स्मिथकी शैली बढ़िया और विद्वत्तापूर्ण है, इसलिए उसका लिखा अच्छा लगता है । पर यह ठीक नहीं । अंग्रेज विद्वान ही बताते हैं कि उसमें बहुत कुछ गलत है, बहुत कुछ रह गया है। विलियम विल्सन इंटरकी भी यही बात है । यहाँ इन पुस्तकोंसे इतिहास नहीं पढ़ाया जायेगा । अध्यापकने हिन्दुस्तानका खूब अध्ययन किया होगा, निरीक्षण किया होगा और वह हिन्दुस्तानका भक्त होगा, तो इतिहास एक ढंगसे पढ़ायेगा । और अगर उसने अंग्रेजी इतिहासोंसे ही अपना दिमाग भर रखा होगा, तो न आपको लाभ होगा और न शिक्षकको; उसे तो शनिको दशा लगी ही है । हमारे यहाँ हर चीज सरकारी स्कूलसे उलटी ही तरह सिखाई जायेगी । गणित- शास्त्र के उदाहरण भी हमारा शिक्षक दूसरी ही तरह बतायेगा । ग्रेग जिन हिन्दुस्तानी बच्चोंको पढ़ाते हैं, उनके लिए वे नया गणितशास्त्र बना रहे हैं । हमारा शिक्षक मैन्चेस्टर से लिवरपूलकी दूरी नहीं पढ़ायेगा । वह यहाँके हालात पर से उदाहरण तैयार करेगा, ताकि गणितशास्त्र से ही इतिहास और भूगोलकी भी शिक्षा मिल जाये । गणित, इतिहास, अर्थशास्त्र और भूगोल सब हमें नये तैयार करने हैं। इसमें आप विद्यार्थी मदद न देंगे तो अध्यापक क्या करेंगे और अध्यापक ही अगर कच्चे होंगे, तो यह साफ है कि सिद्धान्त टूट जायेंगे । ३६-२७ Gandhi HeraPortal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४४९
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