सत्याग्रह आश्रम ४२३ ११. सहिष्णुता आश्रमकी ऐसी मान्यता है कि जगतमें प्रचलित प्रख्यात धर्मं सत्यको व्यक्त करनेवाले हैं । किन्तु वे सब अपूर्ण मनुष्यके द्वारा व्यक्त किये गये हैं, इसलिए सभीमें अपूर्णता अथवा असत्यका मिश्रण हो गया है। इसलिए हमारे मनमें अपने धर्मके लिए जैसा मान हो, वैसा ही हमें प्रत्येक धर्मके लिए रखना चाहिए। जहाँ ऐसी सहिष्णुता हो, वहाँ एक-दूसरेके धर्मका विरोध सम्भव नहीं होता और न परधर्मीको अपने धर्म में लानेका ही प्रयत्न सम्भव होता है। किन्तु नित्य यही प्रार्थना और यही भावना रखी जानी चाहिए कि सभी धर्मोके दोष दूर हों । काम ऊपर बताये हुए नियमोंका पालन करते हुए और उनका पालन किया जा सके इस उद्देश्यसे निम्नलिखित काम आश्रममें किये जाते हैं । १. उपासना आश्रमकी सामाजिक प्रवृत्तियोंका आरम्भ सबेरे ४-१५ बजेकी सामाजिक प्रार्थनासे होता है और साँझके सात बजेसे ७.३० बजे तक होनेवाली प्रार्थनाके साथ समाप्त होता है। सुबह-शामकी यह उपासना सभी आश्रमवासियोंके लिए अनिवार्य है; इसका हेतु चित्त-शुद्धि करना और ईश्वरको समर्पित होना है । २. शौच-सुधार यह काम अत्यन्त आवश्यक और पवित्र होने पर भी अपवित्र गिना जाता है, और उसके प्रति समाजमें बहुत अरुचि है; और इसलिए सामान्यतः सफाई करनेके काम में आरोग्य और सफाईकी दृष्टिसे सुधार करनेकी बहुत गुंजाइश होनेके कारण भी, इसमें मजदूरी देकर दूसरोंके जरिए काम न लेनेका खास आग्रह रखा जाता है । पाखाना इत्यादिकी सफाई आश्रमके व्यक्ति ही बारी-बारी से करते हैं । सामान्य नियम नये आगन्तुकको पहले यही काम सिखानेका है । मलको हमेशा नौ इंचका गढ़ा खोद कर, जो गढ्ढे में से निकलती है उस तथा दूसरी सूखी मिट्टीसे ढँक दिया जाता है और उसका खाद बनाया जाता है। निश्चित स्थानों पर ही लोग पाखाने या पेशाबके लिए जाते हैं। रास्तेमें न थूकने या किसी दूसरी तरहसे आश्रमके रास्ते न बिगाड़नेका खयाल रखा जाता है । ३. कातनेका यज्ञ भारतवर्षका महादुःख उसके करोड़ों लोगोंकी भुखमरी है । इस भुखमरीका मुख्य कारण उसके मुख्य धन्धे सूत कताईका विदेशी राज्य द्वारा जानबूझकर किया गया नाश है । इसलिए इस क्रियाका पुनरुद्धार करनेके लिए कताईको केन्द्र बनाया गया है और वह राष्ट्रयज्ञके रूपमें आश्रमवासीके लिए अनिवार्य है। उसके सम्बन्धमें आश्रम में निम्नलिखित काम होते हैं : १. जुदा-जुदा जातिकी कपासकी खेती, Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४५५
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