सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४५६

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

४२४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय २. चरखा, तकुवा, धुनकी वगैरा बनानेके लिए लोहार और बढ़ई विभाग । ३. कपास लोढ़ना या चुनना । ४. धुनना । ५. डोरी, निवाड़ या बिस्तरकी पट्टी, खादी बुनना । ६. रंगना तथा छापना । ४. खेती आश्रमके निर्वाहके सम्बन्धमें तथा उसे यथासम्भव स्वाश्रयी बनानेके लिए उसमें कपासके अलावा शाक-भाजी, फल वगैराकी खेती की जाती है। ५. दुग्धालय आश्रमकी दूधकी आवश्यकता पूरी करनेके लिए दुग्धालय चलाया जाता है और उसे आदर्श बनानेका प्रयत्न किया जा रहा है। गत वर्षसे यह दुग्धालय अखिल भारतीय गोरक्षा मण्डलकी सहायतासे, किन्तु आश्रमकी एक स्वतन्त्र प्रवृत्तिके रूपमें चलता है । उसमें २७ गायें, १० बैल, ४७ बछड़े-बछड़ियाँ और ८ साँड़ हैं। इसमें रोज ५ मन दूध होता है । ६. चर्मालय दुग्धालयकी प्रवृत्तिके सम्बन्ध में चर्मालय स्थापित किया गया है। इसमें केवल मरे हुए ढोरका ही चमड़ा लिया जाता है और उसे कमाया जाता है। साथ ही मोचीका काम भी चलता है। यदि इस देशमें गोपालनका यथेष्ट सुधार न हो तो गायकी दूध देनेकी शक्ति में वृद्धि नहीं होगी, और मरे हुए ढोरके चमड़ेका सदुपयोग इसी देशमें न हो तो गोरक्षाका दावा करनेवाले इस अहिंसा प्रधान देशमें मवेशी बिना मौत ही मरेंगे और फलस्वरूप मनुष्य भी । इन दो (५ और ६) कामोंके पीछे यही मान्यता है । ७. राष्ट्रीय शिक्षा आश्रम में राष्ट्रके लिए पोषक शिक्षा देनेका प्रयत्न किया जाता है। उसमें नीचेके सिद्धान्तों पर अमल करनेका प्रयत्न किया जाता है। शारीरिक, बौद्धिक और आत्मिक विकासको साथ ही साथ चलानेके लिए औद्योगिक वातावरणका निर्माण किया जाता है । अक्षरज्ञान पर जितना जरूरी हो, उतना ही जोर दिया जाता है और चरित्र दृढ़ करनेकी दृष्टिसे हरएक सूक्ष्म से सूक्ष्म कार्य में भी उसकी आवश्यकता पर जोर दिया जाता है । अन्त्यज बालकोंको दाखिल करनेकी पूरी छूट है । स्त्रियोंकी स्थिति सुधारनेके हेतुसे उनपर खास ध्यान दिया जाता है और उन्हें अपने विकासके लिए पुरुषोंके बराबर ही स्वतन्त्रता दी जाती है। विद्यापीठके नीचे लिखे सिद्धान्तोंको आश्रम स्वीकार करता है : १. विद्यापीठका मुख्य काम स्वराज्य प्राप्तिके लिए चलनेवाले आन्दोलनोंके लिए चरित्रवान्, शक्तिसम्पन्न, संस्कारी और कर्त्तव्यनिष्ठ कार्यकर्त्ता तैयार करना है। Gandhi Heritage Portal