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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४६४

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४७९. बारडोलीकी बलि बारडोली स्वेच्छा से स्वीकार किये हुए कष्ट और बम्बई सरकारको निरंकुशतासे पीड़ित है । इन दोनों बातोंके उदाहरण महादेव देसाईको बारडोली सम्बन्धी टिप्पणियों में मिलेंगे। सरकार मानो मक्खी मारने जैसी बात के लिए एड़ी-चोटीका पसीना एक कर रही है। बढ़ाए गए लगान के १,००,००० रुपयेके लिए, जो सरकार के लिए छोटीसी रकम है, वह शक्ति, असत्य, खुशामद और घूसका सहारा ले रही है। ये शब्द कठोर हैं; किन्तु सरकारकी कार्रवाइयों को देखते हुए कदापि कठोर नहीं हैं। सरकार द्वारा किया जा रहा शक्ति प्रयोग इतना प्रत्यक्ष है कि उसे कोई भी देख सकता है । यों तो जब सत्ता शक्तिका प्रयोग करनेमें असमर्थ होती है तब भी वह उसका दिखावा करती है; किन्तु इस मामले में तो वह अपर्याप्त शक्तिका प्रयोग कर रही है । शक्ति प्रयोग दिखाई दे रहा है इसलिए वह अन्य तरीकोंसे कम खतरनाक है। दूसरे तीन तरीके शरारत से भरे हुए हैं; क्योंकि वे अदृश्य हैं। आयुक्त का अशिष्ट पत्र और सरकारकी छल-पूर्ण विज्ञप्ति उस असत्यके उदाहरण हैं जिसका आचरण अकर्त्तव्योंके रूपमें और कर्तव्योंकी उपेक्षाके रूपमें किया गया है। जब यह काण्ड समाप्त हो चुकेगा, खुशामद और घूसके उदाहरणों का पता तो हमें तब चलेगा। हमें मालूम है कि पंजाबके मार्शल लॉके शासन में उन लोगोंको जो मनुष्यत्वसे गिर गये थे उपाधियाँ दी गई थीं और उनकी पदोन्नति की गई थी। यहाँ बारडोलीमें जो अभी छोटा पंजाब जैसा है, उन्हीं घटनाओंकी पुनरावृत्ति होगी। सरकार जब किसीसे अपने लिए कोई आपत्तिजनक कार्य कराना चाहती है, तब वह लोभ आदिके जिन सूक्ष्म रूपोंका सहारा लेती है मैं उनका वर्णन यहाँ नहीं करूँगा । ज्यादातर सरकारें (साम, दाम, दण्ड, भेद ) चारों तरीकों का सहारा लेती हैं, किन्तु सबसे ज्यादा दुख इस बात से है कि बम्बई सरकार इन सारी शक्तियोंका प्रयोग उन लोगोंकी गर्वीलो भावनाको कुचलनेके लिए खुलकर कर रही है, जो अपने सीधेपन और भोलेपन के लिए प्रसिद्ध हैं । यह कहना कि वे कानून तोड़नेवाले हैं, एक घृणित झूठा आरोप है। यदि कोई मनुष्य जिस दायित्वको स्वीकार नहीं करता, उसका कानून द्वारा प्रतिवाद कर सकता है, तो लोग जिस लगानको शासन द्वारा अपने ऊपर अन्यायपूर्वक थोपा गया मानते हैं, उसका कानून द्वारा प्रतिवाद क्यों न करें ? और सरकार जिस लगानको वाजिब समझती है उसकी वसूलीके लिए उन्हीं दीवानी कानूनोंको काममें लाकर सन्तुष्ट क्यों नहीं हो सकती, जो अन्य व्यक्तियोंके लिए खुले हैं ? किन्तु बारडोली के लोगोंको मनमाने तौर पर जो कष्ट दिये जा रहे हैं उससे वे ऊंचे उठे हैं, क्योंकि वे उसके लिए तैयार थे। सीधे सादे किसानोंने जो बहादुरीका रुख अपनाया है उससे सरकारकी वह इज्जत, जिसको बनाये रखनेके लिए सरकार जी-जान से कोशिशें कर रही है और जिनकी चर्चा इन पृष्ठोंमें सप्ताह प्रति सप्ताह की जाती है, अप्रत्यक्ष रूपसे ही सही, बहुत कम हो गई है । Gandhi Heritage Portal