बारडोलीका मामला क्या है ? ४३३ किन्तु एक पापी और क्रूर सत्ता द्वारा दिये गये कष्टसे अधिक आत्मशुद्धि करने- वाला कष्ट तो वह है जिसे वे स्वयं अपने ऊपर ले रहे हैं। मेरा संकेत बारडोली और वालोडके तिरेसठ पटेलों और ग्यारह तलाटियोंके त्यागपत्रोंकी ओर है । इन लोगोंके लिए अपने पदोंको छोड़ना कोई छोटी बात नहीं है। उन्होंने अब तक अकसर इन पदोंका उपयोग अपने साधारण वेतनोंमें गैरकानूनी वृद्धि करनेमें किया है। इन जैसे लोगोंके लिए अपनी नौकरियाँ छोड़ना बड़े सरकारी अधिकारियोंकी अपेक्षा अधिक कठिन है । किन्तु कष्ट सहन और वीरता तो विनीत लोगोंकी निशानी है । मैं इन पटेलों और तलाटियोंको सादर बधाई देता हूँ । उनको यह ज्ञात होना चाहिए कि समस्त भारतने उनके बलिदानकी सराहना की है। जैसा बलिदान उन्होंने किया है वैसा बलिदान करनेसे ही हमें स्वतन्त्रता मिलेगी। हम सरकारी पदोंका लालच नहीं छोड़ सकते । सरकार हमारी इस कमजोरीको जानती है और इसका उपयोग अपनी ताकतको मजबूत करनेके लिए करती है। किन्तु यदि हमें विश्वास हो कि जिसने हमें पैदा किया है वह हमारा पालन-पोषण भी अवश्य करेगा; यदि हम केवल उसकी इच्छाके अनुसार आचरण करें, अर्थात् ईमानदारीसे अपने हाथों और पैरोंसे काम करें तो हम कभी भूखे नहीं रहेंगे और सत्ताके सम्मुख कभी दीनता नहीं दिखायेंगे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १४-६-१९२८ ४८०. बारडोलीका मामला क्या है ? बहुत से लोगों द्वारा यह माँग किये जाने पर कि व्यस्त पाठकके लिए मामलेका न्यूनतम संक्षेप दिया जाना चाहिए, निम्नांकित सारांश तैयार किया गया है । यद्यपि इस मामलेका ब्यौरेवार उल्लेख इन पृष्ठोंमें किया जा चुका है, तो भी उन लोगोंके लिए जो सत्याग्रहियोंकी मदद करना चाहते हैं परन्तु जिन्हें यह मालूम न हो कि वास्तवमें मामला क्या है और जिनके पास कागजोंकी फाइलें पढ़नेका वक्त न हो; निम्नांकित संक्षेप सहायक सिद्ध होगा । संक्षेप इसलिए आवश्यक है क्योंकि बारडोलीके लोगोंने कष्टोंका जिस बहादुरीसे सामना किया है, उससे इस मामलेमें लोगोंकी रुचि निरन्तर बढ़ती रही है । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १४-६-१९२८ १. महादेव द्वारा लिखित लेखके लिए देखिए, परिशिष्ट ३ । ३६-२८ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४६५
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