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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४६७

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पत्र : आर० बी० ग्रेगको ४३५ पर अच्छा असर नहीं पड़ा है। उनका स्वास्थ्य भी आजकल बहुत अच्छा नहीं है । उनमें मानसिक और शारीरिक थकावट आ गई है। इस सबके बावजूद मैंने भरसक कोशिश की, परन्तु असफल रहा। खेद है कि मुझे आपको निराश करना पड़ रहा है । परन्तु आप यह स्वीकार करेंगे कि मैं कितना मजबूर हूँ । आखिरकार वे स्वतन्त्र हैं और उन्हें हमेशा स्वतन्त्रता दी गई है । मुझे खुशी है कि अब आप बिलकुल ठीक हैं । अंग्रेजी (एस० एन० १३४१६) की फोटो नकलसे । ४८३. पत्र : आर० बी० ग्रेगको हृदयसे आपका, बापू सत्याग्रह आश्रम साबरमती प्रिय गोविन्द, । १५ जून, १९२८ तुम्हारा पत्र मिला । तुम्हारी दलील ठीक है । और चूंकि तुम्हारी अन्तरात्मा भी यह कहती है कि हमारे समान उद्देश्यकी पूर्तिके लिए इस वक्त तुम्हारा स्थान भारतकी अपेक्षा अमेरिकामें है, इसलिए मुझे कुछ कहनेके लिए रह नहीं जाता। मैं तुम्हारे लिये अमेरिकामें हर तरहकी सफलताकी कामना करता हूँ। और चूंकि मुझे तुम्हारा निर्णय स्वीकार है, मुझे और कुछ कहनेकी जरूरत नहीं है। आशा है कि मैं दिसम्बरको छोड़कर सारे साल आश्रममें रहूँगा । कुछ ऐसी सम्भावना है कि मैं अक्तूबर में बर्मा जाऊँ। परन्तु यदि ऐसा हुआ तो यह उस महीनेके अन्त तक ही होगा। ऐसा कार्यक्रम बना तो तुम्हें काफी पहले पता चल जायेगा। तुम किसी भी हालतमें बिना मिले न चले जाना । में तुम्हारा विज्ञान प्रवेशिका देखनेकी प्रतीक्षामें हूँ । काश, आश्रम में जो महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किये गये हैं, मेरे पास उनका वर्णन करनेके लिए समय होता । यदि मुझे वक्त मिला तो मैं तुम्हें उन परिवर्तनोंका विवरण दूंगा, नहीं तो तुम स्वयं उन्हें पूरी तरह कार्यान्वित होते हुए देख लेना । मुझे आशा है कि अब तुम पूरी तरह स्वस्थ और अच्छे होगे । तुम सबको सस्नेह, रिचर्ड बी० ग्रेग कोटगढ़ शिमला हिल्स अंग्रेजी (एस० एन० १३४१७) की फोटो - नकलसे । Gandhi Heritage Portal