गवर्नर और बारडोली ४४१ बदल जाय तो संसारकी यह सबसे अधिक खर्चीली राज्य-व्यवस्था ठप हो जाये अथवा उसका खर्च लोगोंके सामर्थ्यके अनुसार सीमित हो जाये । गवर्नर साहबका कहना है राज्य और प्रजाके बीच स्वतन्त्र जाँच की ही नहीं जा सकती। ये महानुभाव ऐसा कहकर लोगोंकी आँखोंमें धूल झोंकते हैं । स्वतन्त्र जाँच भी सरकारी जाँच ही होगी। न्याय-विभाग शासन-विभागसे स्वतन्त्र होने पर भी एक सरकारी विभाग ही है । समितिकी नियुक्ति लोग करें, यह माँग किसीने नहीं की है। किन्तु लोगोंकी माँग यह है कि बारडोलीके लगानके मामलेकी छानबीनके लिए तटस्थ लोगोंकी नियुक्ति की जाये और जैसी जांच अदालतमें की जाती है वैसी की जाये। इसमें सरकार राज्यकी बागडोर छोड़ दे, यह बात नहीं आती, किन्तु वह अपनी निरंकुश नादिरशाहीको छोड़ दे यह बात अवश्य आती है, और यदि लोगोंको स्वराज्य मिलना है और उनको वह प्राप्त करना है तो इस नादिरशाहीका सर्वथा नाश होना ही है । इस दृष्टिसे बारडोलीकी लड़ाईने अब व्यापक रूप ले लिया है। अथवा यह कहना चाहिए, हमारे सौभाग्यसे सरकारने उसको व्यापक रूप दे दिया है । सत्याग्रहका शस्त्र गैरकानूनी है, श्री मुन्शीकी यह युक्ति अथवा मान्यता दुःखद है। अब तो शस्त्र प्रतिष्ठित हो चुका है। जब इसका प्रयोग दक्षिण आफ्रिकामें किया गया था तब लॉर्ड हॉर्डिगने इसका समर्थन किया था । चम्पारनमें बिहार सरकारने उसको स्वीकार करके जाँच समिति नियुक्त की थी। श्री वल्लभभाईने बोरसदमें इसी शस्त्रका प्रयोग किया था और हाल ही में गवर्नर साहबने उसको मान्यता देकर लोगोंके साथ न्याय किया था। अब इस शस्त्रको क्यों गैरकानूनी माना जाये यह बात समझ में नहीं आ सकती । किन्तु प्रस्तुत प्रश्न यह नहीं है कि सत्याग्रह गैरकानूनी है या कानूनी । यदि लोगोंकी माँग उचित हो तो, उनकी माँग करनेकी रीति चाहे कुछ भी हो, उससे उस माँगका औचित्य कम नहीं हो सकता है। इस प्रश्नका निर्णय करना केवल बारडोलीके सत्याग्रहियोंके हाथमें है । यदि उनका त्याग और साहस सच्चा होगा, तो इसका निर्णय एक ही रूपमें होगा । यदि लोग लगान नहीं देंगे तो सरकारको या तो वह माफ कर देना पड़ेगा या जाँच समिति नियुक्त करनी पड़ेगी । लोगोंका मान उनके अपने हाथमें ही है । यह बात इस पत्र-व्यवहार से स्पष्ट झलकती जाती है। इस १२ तारीखको देशमें स्थान-स्थान पर बारडोलीके लोगोंकी प्रशंसा की गई है । बारडोलीसे बाहरके लोग फिलहाल एक ही काम कर सकते हैं, वह है रुपयेकी सहायता और सहानुभूति प्रदर्शन। रुपयेकी सहायता सभी जगह से खुल कर मिल रही है । अब तक यहाँ एक लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं। सारे हिन्दुस्तान में बारडोलीकी माँग का एक मतसे स्वागत किया गया है। किन्तु निरंकुश सरकार तो [ पशु ] बलसे ही डरती है। लोगोंने पशुबलका त्याग सोच-समझकर किया है। बारडोली सत्याग्रह- रूपी आत्मबलका प्रयोग कर रहा है। इसके मुकाबले में सरकारका बल तुच्छ है । क्या बारडोली अपनी प्रतिज्ञाका पालन करेगा ? Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४७३
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