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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४८१

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प्रिय मित्र, ४९७. पत्र : सी० विजयराघवाचारियरको सत्याग्रह आश्रम साबरमती १७ जून, १९२८ मुझे आपका स्नेहपूर्ण पत्र और कृपापूर्ण चेक भी मिला। मुझे मालूम है कि वल्लभभाई इसकी बड़ी सराहना करेंगे । मैं आपके इस कथन से सहमत हूँ कि यदि सर्वदलीय समिति एक सुसम्पूर्ण संविधान प्रस्तुत नहीं कर पाती, तो यह बड़े दुःखकी बात होगी। मुझे मालूम है कि मोतीलालजी इसके लिए बहुत उत्सुक हैं और इसलिए मुझे आशा है कि समिति इस कामको अवश्य पूरा कर देगी । मुझे 'हिन्दू' के कार्यालयसे वह कतरन जरूर मिली थी जिसमें आपकी भेंट- वार्ताका विवरण था । मैंने इसे बड़े चावसे पढ़ा, परन्तु मैं श्री दासके बारेमें आपके मन्तव्य से सहमत नहीं हूँ । बहरहाल अब मेरे लिए अपनी असहमतिके कारणोंकी चर्चा करना अनावश्यक है। मेरे प्रति आपका स्नेह जो मुझे उस भेंटमें छलकता हुआ दिखाई दे रहा है और जिसको मैंने सदा अपनी एक बड़ी प्राप्ति माना है, मेरे लिए कोई नया आविष्कार नहीं था। मैं 'यंग इंडिया' के प्रबन्धकको आपको अपेक्षित जानकारी मेजनेके लिए कह रहा हूँ । अंग्रेजी (एस० एन० १३४२४) की फोटो- नकलसे । हृदयसे आपका, ३६-२९ Gandhi Heritage Portal