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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४८८

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४५६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय संघ द्वारा और आधेकी 'यंग इंडिया' के कार्यालय द्वारा की जानी चाहिए। इसके लिए मैं मोहनलालको लिख रहा हूँ । आपको जमनालालजी और श्री बैंकरकी मंजूरी चाहिए होगी। कृपया वह मंजूरी ले लें और रकमकी अदायगी कर दें। अब मुझे इस बारे में और ज्यादा चिन्ता करनेकी या श्री बैंकरको लिखने या जमनालालजीसे बात करनेकी जरूरत नहीं है। श्रीयुत के० एस० सुब्रह्मण्यम अ० मा० च० संघ, मिर्जापुर अहमदाबाद अंग्रेजी (एस० एन० १३४२८) की माइक्रोफिल्म से । ५०७. पत्र : शंकरन्को हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती प्रिय शंकरन्, २० जून, १९२८ तुम्हारा पत्र मिला । सूची मेरे ही पास बनी रही। बिना मुझसे वह सूची लिये प्राप्ति-स्वीकृति 'नवजीवन' में छप गई थी। 'नवजीवन 'में प्राप्ति-स्वीकृतिके छप जानेका मुझे केवल तुम्हारे पत्रसे पता चला। 'यंग इंडिया' के बारेमें में स्वयं इस सम्बन्धमें देख रहा था और इसलिए मैंने कल गलती ठीक कर दी और पूरी सूची छपवा दी है, जिसे तुम इस सप्ताहके 'यंग इंडिया' में देखोगे । यह सब तुम्हारा पत्र आनेसे पहले हो गया था । बहरहाल मुझे आशा है कि सारे नाम 'नवजीवन' में प्रकाशित मिलेंगे। मैंने कहा, मुझे आशा है, क्योंकि मुझ पर इस वक्त कामका इतना बोझ है कि मैं यह भूल भी सकता हूँ । महादेव कुएँ पर वहाँसे पानी भरते हुए बड़ी बुरी तरह गिर पड़ा था। वह ५ दिन विस्तरपर पड़ा रहा। अब पहलेसे बेहतर है और दो तीन दिनोंमें बिलकुल ठीक हो जायेगा । अब तुम्हारे प्रश्नोंके बारेमें: यद्यपि वह काम जिसके लिए चन्दा दिया गया था पूरा हो गया हो, तो भी बाकी बचा पैसा दान लेनेवालेकी इच्छाके किसी काम पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। क्योंकि हो सकता है, जिसे दान लेनेवाला बेहतर काम समझता हो, दान देनेवालेकी नजर में वह बुरा काम हो । अभी उसी किस्मका एक उदाहरण मेरे सामने आया और जिसका मुझे कल ही निर्णय करना पड़ा। एक सज्जनने जमनालालजीको राष्ट्रीय पाठशालाओंके सम्बन्धमें रु० १०,००० दिये । वह धन राशि अभी बिना इस्तेमाल किये पड़ी है। जमनालालजी उस धनका उपयोग राष्ट्रीय शिक्षाके लिए करना चाहते हैं और राष्ट्रीय शिक्षामें अछूत भी शामिल Gandhi Heritage Portal