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132 GAN 8941 १६. टिप्पणियाँ NOJ 1970 दक्षिण आफ्रिकी संघ यद्यपि परम माननीय श्रीनिवास शास्त्रीके साहसपूर्ण प्रयत्नोंसे दक्षिण आफ्रिकामें रहनेवाले भारतीयोंका सामाजिक दर्जा निःसन्देह ऊँचा उठा है और वहाँ स्वाभिमानी भारतीयोंका जीवन पहलेकी अपेक्षा कम दुर्वह हो गया है, फिर भी कभी-कभी उस उप-महादेशसे ऐसे पत्र आते रहते हैं जो बताते हैं कि अभी वहाँ और बहुत काम करना बाकी है, तब जाकर भारतीय प्रवासियोंको सामान्य नागरिक अधिकार मिलेंगे और वे अपनी स्थिति सुरक्षित समझेंगे। अभी हालमें दक्षिण आफ्रिकी भारतीय कांग्रेसके नये उपप्रधान श्री अल्बर्ट क्रिस्टोफरका एक ऐसा ही दुःखजनक समुद्री तार मिला है। श्री क्रिस्टोफर बोअर युद्धमें और पिछले महायुद्धमें स्वयंसेवकके रूपमें काम कर चुके हैं। वे दक्षिण आफ्रिकामें पैदा हुए हैं और इंग्लैंडमें अपनी पढ़ाई खत्म करके अभी लौटे हैं। उनका समुद्री तार इस प्रकार है : प्रबल विरोधके बावजूद संसदमें मद्य-विधेयकका दूसरा वाचन चालू । विधेयकका उद्देश्य तीन हजार भारतीयों, उनके परिवारों और आश्रितोंको उनकी आजीविकासे वंचित करना और अन्तमें देशसे बाहर निकालना । विधेयक भाषा और भावनामें केपटाउन समझौते के बिलकुल विरुद्ध । स्पष्ट प्रजातीय विधान । सरकार के रुख से भारतीय बहुत भयभीत । यदि विधेयक स्वीकृत हुआ तो केपटाउन समझौता रद । आपसे तुरन्त हस्तक्षेप करनेका हार्दिक अनुरोध । दक्षिण आफ्रिकाके जाने-माने पत्र भी दक्षिण आफ्रिकी कांग्रेसकी इस रायसे सहमत हैं कि यह विधेयक गोलमेज परिषदके फलस्वरूप हुए समझौतेको भंग करता है । किन्तु यह बात निर्विवाद है कि यह उन लोगोंके भी विरुद्ध है जो होटलों और शराबखानों से इस समय ईमानदारीसे रोजी कमा रहे हैं। यदि संघ संसद इस विधेयक पर विचार जारी रखती है तो इसका अर्थ केवल यही होता है कि समझौते में अधिक सशक्त पक्ष होनेके बल पर सरकार जब चाहे तब इस समझौतेको बिना कोई जोखिम उठाये तोड़ सकती है। हमें आशा है कि श्री शास्त्रीके नम्रतापूर्ण दौत्यसे यह संकट टल जायेगा, इतना ही नहीं, बल्कि इससे संघ सरकार, संघ संसद और दक्षिण आफ्रिकाके गोरे लोगोंकी प्रतिष्ठाकी रक्षा, उनके न चाहने पर भी हो सकेगी। किन्तु उन्हें भारत के समाचारपत्रों और भारतीय जनताके प्रबल समर्थनकी जरूरत है। चीनका उदाहरण एक मित्रने 'न्यूयार्क टाइम्स से एक कतरन मुझे भेजी है जिसमें चीनके एक सुप्रसिद्ध व्यक्ति श्री कु हंगमिंगके साथ मुलाकातका ब्यौरा छपा है । उसमें श्री कु चीनी लोगोंकी सांस्कृतिक महत्ता और विदेशियों द्वारा उसे घटाकर बतानेका जिक्र करते हुए और विदेशी व्यापारियोंके प्रवेशके बारेमें चर्चा करते हुए कहते हैं : ३६-२ 8941 Gandarage FERENCE BOOK 11 1 DEC 1982 age Portal