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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४९७

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बारडोलीका घपला ४६५ कहाँ है ? मगर सरकारके अधिकारियोंकी स्वच्छन्दता पर जरा भी लगाम लगानेसे सरकारका पारा बहुत ऊँचा चढ़ जाता है । और जब ब्रिटिश सिंह भारतमें क्रुद्ध हो उठे, तब 'नम्र हिन्दुओं' का रक्षक तो राम ही है। मगर हाँ, ईश्वर असहायोंकी सहायता अवश्य करता है, परन्तु वह तभी करता है जब मनुष्य पूरी तरह असहाय हो जाये । परमात्माने भारतके लोगोंको सत्याग्रहके रूपमें आप ही कष्ट सहनेका 'गाण्डीव' दिया है। उसके प्रभावसे लोग युग-युगका आलस्य छोड़कर उठ रहे हैं । बारडोलीके किसान हिन्दुस्तानियोंको दिखा रहे हैं कि वे निर्बल भले ही हों, मगर उनमें अपने विश्वासोंके लिए कष्ट सहन करनेका साहस है । अब इतने दिनों बाद तो सत्याग्रहको अवैध कहनेका अवसर नहीं रह जाता । यह तो तभी अवैध होगा, जब सत्य और उससे सम्बद्ध आत्म-त्याग अवैध बन जायेंगे । लॉर्ड हार्डिगने दक्षिण आफ्रिकाके सत्याग्रहको आशीर्वाद दिया था और उसके आगे वहाँकी सर्वशक्तिमान संघ सरकारको भी झुकना ही पड़ा था । उस समयके वाइसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड तथा बिहारके गवर्नर सर एडवर्ड गेटने इसकी वैधता और इसकी कार्य-साधकताको स्वीकार किया था और चम्पारनकी रैयतकी शिकायतोंकी जाँचके लिए एक स्वतन्त्र समिति बैठाई गई थी, जिसके फलस्वरूप सरकारकी प्रतिष्ठा बढ़ी और सौ वर्ष पुराना अन्याय दूर हुआ। फिर यह खेड़ामें भी स्वीकार किया गया और चाहे बेदिलीसे ही सही और चाहे यह अधूरा ही था, मगर खेड़ाके सरकारी अधिकारियों और आन्दोलन चलानेवालों तथा प्रजाके नेताओंके बीच समझौता हुआ था । मध्य- प्रान्तके तात्कालिक गवर्नरने नागपुर झंडा सत्याग्रहियोंसे समझौता करना ही ठीक समझा था, कैदियोंको छोड़ दिया था और सत्याग्रहियोंके हकको स्वीकार किया था । अन्तमें, और तो और बम्बईके गवर्नर लेस्ली विल्सनने भी, जब वह शुरू-शुरू में संसारके सबसे अधिक योग्य शासनाधिकारियोंके संसर्ग" से अछूते थे, स्वयं बोरसदमें सत्याग्रहके बलको स्वीकार किया था और बोरसदवालोंको राहत दी थी । 14 मैं चाहता हूँ कि गवर्नर साहब और श्री मुंशी, दोनों ही पिछले चौदह वर्षोंकी इन घटनाओंको गाँठ बाँध लें । बारडोलीका सत्याग्रह अब अचानक अवैध घोषित नहीं किया जा सकता । हकीकत तो यह है कि सरकारके पास कोई दलील नहीं है । वह नहीं चाहती कि खुली जाँचमें उसकी लगान नीतिको चुनौती दी जाये । अगर बारडोलीवाले आखिरी आँच सह गये तो या तो खुली जाँच होगी या इजाफा लगान मंसूख होगा। यह उनका निर्विवाद हक है कि वे अपनी शिकायतके लिए निष्पक्ष अदालत के सामने सुनवाईका दावा करें। [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २१-६-१९२८ ३६-३० Gandhi Heritage Portal