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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/४९८

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५१०. टिप्पणियाँ स्वर्गीय गोपबन्धु बाबू मैं 'यंग इंडिया' के लिए लिखने बैठा हूँ और इसी बीचमें मुझे नीलकण्ठ बाबूका यह तार मिला है कि साखी गोपालमें पण्डित गोपबन्धुदासका देहान्त हो गया है। पं० गोपबन्धुदास दुःख और विपत्तिसे मारे उड़ीसाके सर्वश्रेष्ठ सुपुत्रोंमें से एक थे । गोपबन्धु बाबूने उड़ीसाको अपना सर्वस्व समर्पण कर दिया था। मैंने गोपबन्धु बाबूके बारेमें और उनके निष्कलंक चरित्र तथा दृढ़ताके बारेमें सन् १९१६ में जब अकाल पीड़ितोंको सहायता पहुँचानेके लिए श्री अमृतलाल ठक्कर उड़ीसा भेजे गये थे, तब सुना था। श्री ठक्कर मुझे लिखा करते थे कि किस भाँति असहायोंकी सहायता करनेके लिए गोपबन्धु बाबूने कष्टों और रोगोंका बहादुरीसे सामना किया । असहयोगके जमाने में उन्होंने अपनी वकालत और कौंसिलकी मेम्बरी छोड़ दी और फिर वे कभी डिगे नहीं। मगर उनके लिए जो इससे भी बड़ा त्याग था, वह यह कि उन्होंने अपनी प्रियतम कृति सत्यवादी स्कूलको भी खतरेमें डाल दिया। इसके लिए उन्होंने अपने कुछ निकटतम मित्रोंके ताने सहे, किन्तु वे अपने मार्गसे, जिसे उनके ये मित्र उनकी मूर्खता समझते थे, विचलित नहीं हुए। यह एक ऐसी बात है जो उनकी कीर्तिको चिरकाल तक जीवित रखेगी। उनके जीवनकी एक अभिलाषा यह थी कि वह टुकड़ोंमें विभक्त उत्कलको संयुक्त और सुखी देखना चाहते थे । अभी हालमें वे लाला लाजपतरायकी समितिमें शामिल हो गये थे । वे गरीबी तथा बाढ़से पीड़ित उत्कलको आर्थिक सहायता पहुँचानेके लिए खादीको उपयोगी साधन बनानेकी योजना बना रहे थे। पण्डित गोपबन्धु दासके अवसानसे देश और भी गरीब हो गया है । यद्यपि आज वे सशरीर हम लोगोंके बीच नहीं हैं मगर उनकी आत्मा तो है ही । तब वही पुण्यात्मा उड़ीसाके कार्यकर्ताओंका पथ-प्रदर्शन करे। उनकी मृत्युसे हमारे इधर-उधर बिखरे कार्यकर्त्ताओंको, जिनकी संख्या राष्ट्रीय आवश्यकताओंके अनुपात में बहुत ही कम है, इस बातकी प्रेरणा मिलनी चाहिए कि वे अपने सेवा कार्यमें और अधिक जुट जायें, पहलेसे अधिक प्रयत्न और अधिक आत्मत्याग करें और उनमें और अधिक एकता हो । मैं इस स्वर्गीय देशभक्तके कुटुम्बियों तथा शिष्योंके प्रति संवेदना प्रकट करता हूँ । युवकोंके लिए लज्जास्पद एक संवाददाताने मुझे एक अखबारकी कतरन भेजी है। इससे मालूम होता है कि कुछ समय से हैदराबाद, सिन्धमें वरोंकी दहेजकी माँग भयंकर रूपसे बढ़ती जा रही है । इम्पीरियल टेलीग्राफ इंजीनियरिंग सेवाके एक कर्मचारीने सगाईके वक्त ही २०,००० रुपये नकद वसूल किये हैं और उसके बाद विवाहमें और दूसरे खास मौकों पर भारी रकमें दिये जानेका वादा करा लिया है। यदि कोई युवक दहेजको विवाहकी Gandhi Heritage Portal