५१२. पत्र : ईथल एंगसको सत्याग्रह आश्रम साबरमती २२ जून, १९२८ प्रिय मित्र, आपका पत्र मिला, धन्यवाद । यदि मैं अगले साल यूरोप जानेमें सफल हुआ और तब यदि यह किसी तरह भी सम्भव हुआ तो मैं निश्चय ही आपका कृपापूर्ण आतिथ्य स्वीकार करूँगा । इस बारेमें मुझे कोई सन्देह नहीं कि यूरोपके अन्य भागोंकी तरह इंग्लैंडमें भी मेरे बहुतसे मित्र हैं । श्री राजगोपालाचारी दक्षिणमें अपने आश्रमकी बराबर उन्नति कर रहे हैं। मैं आपका पत्र उन्हें भेजनेकी धृष्टता कर रहा हूँ और मुझे मालूम है कि वह इस पत्रको बड़े चाव से और प्रसन्नतापूर्वक पढ़ेंगे । । मैं आपको और रेवरेंड जॉन टॉड फेरियरको उनकी पुस्तकोंके लिए धन्यवाद देता हूँ । मेरे मित्र जो कई एक पुस्तकें मुझे भेजते हैं, मैं उन्हें पढ़ना तो बहुत चाहता हूँ, परन्तु उसके लिए वक्त नहीं मिलता । परन्तु आपने जो पुस्तकें भेजी हैं, उनमें से कुछको मैं सरसरी नजरसे देख गया हूँ । भोजनकी शुद्धतासे सम्बन्धित तर्क मुझे, जैसा कि स्वाभाविक है, बहुत अच्छे लगे हैं । अंग्रेजी (एस० एन० १४३३४) की फोटो - नकलसे । ५१३. पत्रः रामलाल बलराम वाजपेयीको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती २२ जून, १९२८ प्रिय मित्र, आपका पत्र मिला । आपने कुo मेयोका जो लेख मुझे भेजा था, उसे पढ़ गया हूँ । उस निन्दात्मक लेखका उत्तर देनेकी मेरी कोई इच्छा नहीं है। यदि ऐसे लोग हैं, जिन्हें कु० मेयो द्वारा गढ़ी हुई कहानी पर विश्वास है तो ऐसे लोगोंको मेरी ओरसे प्रतिवाद किये जाने पर भी कोई सन्तोष नहीं हो सकता । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५०१
दिखावट