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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५१४

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४८२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय करते हैं। इसके बजाय यदि वे लोगोंकी माँगके अनुसार जाँच समितिको नियुक्ति कर दें तो उससे लोगोंका और उनके समर्थकोंका भ्रम दूर होगा। यदि कोई मनुष्य अपने पास किसी वस्तुके होनेका दावा करे और उसमें उसको दिखानेकी शक्ति हो, फिर भी वह दिखानेसे इन्कार करे, किन्तु साथ ही आग्रहपूर्वक यह भी कहता जाये कि उसके पास यह वस्तु अवश्य है तो सब लोग उसे ढोंगी कहकर उसकी हँसी उड़ायेगे । गवर्नर साहबके सम्बन्ध में भी ऐसा ही हो रहा है । गवर्नर साहबके समर्थक उनके प्रचार विभागके अधिकारीने तो और भी हद कर दी है। उन्होंने महादेव देसाईकी बताई हुई पठानोंकी अनुचित कार्रवाइयोंका ब्यौरेवार खण्डन करनेका प्रयत्न किया है। यदि लोगों पर अन्याय होता है, तो वे उसके विरुद्ध पुकार करते हैं यह सनातन पद्धति है । किन्तु राज्य इस पुकारकी तटस्थ होकर स्वतन्त्र जाँच करनेके बजाय अपराधियोंको अपने सामने बुलाता है, और उनका एकतर्फा जवाब सुनकर आरोप- कर्त्ताओंको भगा देता है और ऐसा करके अपने आपको कृतार्थं मानता है । इस समय इस राज्यका तरीका यही दिखाई देता है। लोगोंकी शिकायत सच्ची है या झूठी है वे इसकी जाँचके लिए स्वतन्त्र पंचकी माँग करते हैं । सरकार उनकी इस माँगको कैसे माने ? अपराधी शासक ऐसे पंचकी नियुक्ति कैसे होने दें ? कैसे इस मांगको मंजूर करने दें ? I सरकार कहती है कि बारडोलीके कुछ बनिए पठानोंको चौकीदारी आदिके लिए नौकर रखते हैं। उनके विरुद्ध तो कोई शिकायत नहीं करता । तब यदि सरकार उनको नौकर रखती है तो उसमें क्या दोष है ? मानो एक अपराध दूसरे अपराधको ढक सकता है । फिर बनिए या कोई दूसरे लोग पठानोंको नौकर रखते हैं तो यह बात लोगोंको नहीं चुभती, यह सरकारने कैसे जाना ? तथ्य यह है कि गुजरात में पठानोंको चौकीदारी आदि कामोंके लिए नौकर रखनेकी लोगोंकी आदत बढ़ती जाती है। इससे लोग त्रस्त हैं। इसका दण्ड अन्तमें उनको नौकर रखनेवाले लोगों और अन्योंको अवश्य भोगना होगा। सरकार यह कहती है कि सभी पठान विदेशी नहीं हैं, यह कथन तो उसका निरा भोलापन बताता है। लोगोंको पठान शब्द नहीं चुभता । उनको पठान जातिसे कोई विरोध नहीं है । लोगोंको विदेशियोंके विरुद्ध विदेशी होनेके कारण आपत्ति नहीं हो सकती । पठानोंमें बहुत-से लोग वीर और सज्जन हैं । उनका स्वागत लोग सदा करेंगे। किन्तु यहाँ पठानका अर्थ गुण्डा और हत्यारा है । दुर्भाग्यसे पठानोंमें ऐसे दुष्कर्मी लोग मौजूद हैं। वे अपने पहाड़ी प्रदेशसे घनकी खोजमें हिन्दुस्तानमें आते हैं। हिन्दुस्तानके लोग और उनमें विशेषतः गुजरातके निःशस्त्र, मीरु और शान्तिप्रिय लोग ऐसे पठानोंसे डरते हैं। अच्छे, वीर और सज्जन पठान दरबान या चौकीदारकी नौकरीकी खोजमें हिन्दुस्तान में नहीं आते । बनिए और दूसरे लोग पठान नौकर ढूंढ़ते और रखते हैं तो उनकी आतंककारी शक्तिके कारण ही । गुजराती गुजरातीका मुकाबला कर सकता है। इसलिए गुजरातीको नौकर रखनेसे डरपोक बनिएको सन्तोष नहीं होता। वह अपने आपको सुरक्षित नहीं मानता। इससे जो नुकसान होता है वह उसको अपनी संकुचित दृष्टिके कारण नहीं देख सकता । किन्तु Gandhi Heritage Portal