५२८. पत्र : लिली मुथुकृष्णाको आश्रम प्रिय बहन, साबरमती २४ जून, १९२८ इसके साथ मुथुकृष्णाकी पत्नी और बच्चोंके पते' दे रहा हूँ। उनके बहनोई श्री पिल्लैने यह पते दिये थे। श्री पिल्लै डर्बन मजिस्ट्रेटकी कचहरीमें भारतीय दुभाषिया हैं । अंग्रेजी (एस० एन० १३४३५) की माइक्रोफिल्मसे । ५२९. पत्र : नीलकण्ठको हृदयसे आपका, आश्रम साबरमती प्रिय नीलकण्ठ बाबू, २४ जून, १९२८ छगनलालको शुक्रवारके दिन भेजनेका पूरा इन्तजाम कर लिया गया था। परन्तु उसी दिन एक आकस्मिक घटनाके कारण मैं उसे आपके पास न भेज सका। अब मैं उसे रोके हुए हूँ, परन्तु आशा है कि अनिश्चित काल तक नहीं रोक रखूंगा । ऐसी उम्मीद है कि घबराये हुए कार्यकर्त्ताओंको सान्त्वना देनेके लिए श्रीयुत अमृतलाल ठक्कर थोड़े समय तक आपके पास रहेंगे। परन्तु यदि मैं छगनलालको न भेज सकूं, तो ऐसे दूसरे आदमीकी तलाश कर रहा हूँ जो उसकी जगह ले सके । परन्तु इस बीच आप मुझे बता दीजिए कि क्या आपको बरसातके मौसममें सचमुच ही किसीकी जरूरत होगी ? क्या आप इस मौसममें चरखेका कुछ ज्यादा काम कर सकते हैं ? कृपया तारसे उत्तर दीजिये कि क्या आप किसीको शीघ्र ही चाहते हैं और क्या आप छगनलाल गांधीकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति ले सकते हैं ? मुझे आशा है कि उस बड़ी विपत्तिकी चोटसे व्याकुल आप सब लोगोंका मन अब कुछ शान्त हुआ होगा और आप सब गोपबन्धुबाबूका काम और अधिक उत्साहसे कर रहे होंगे । अंग्रेजी (एस० एन० १३४३६) की माइक्रोफिल्मसे । हृदयसे आपका, १. पते उपलब्ध नहीं हैं । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५१८
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