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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५२२

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४९० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय दान देनेवालोंको इस बातकी छूट है और मजदूर संघ स्वयं भी उन्हें इसके लिए आमन्त्रित करता है कि वे एक निरीक्षण समिति नियुक्त करें, जिसे संघ द्वारा चलाये गये स्कूलोंकी कार्य-विधि और खर्चकी छानबीन करने और निरीक्षण करनेका अधिकार होगा । और समितिसे निरीक्षणकी रिपोर्ट मिलनेपर दान देनेवालोंको स्कूलोंके सम्बन्धमें शर्तें लगाने या सुझाव देनेका और यदि मजदूर संघ इन शर्तों और सुझावोंको कार्यान्वित न करे, तो स्कूलोंको दिये जानेवाले अनुदानको स्थगित कर देनेका मी अधिकार होगा। परन्तु इसमें शर्त यह होगी कि दान देनेवाले इस तरहके अनुदानको रोकनेसे पहले, यदि मजदूर संघ उन शर्तों और सुझावोंको कार्यान्वित न कर सके और उसके सम्बन्धमें कोई स्पष्टीकरण देना चाहे, तो उसे सुन लें । श्रीयुत गोवर्धनभाई आई० पटेल सदस्य, अहमदाबाद मिल तिलक स्वराज्य-कोष समिति लालावासाकी गली साँकड़ीसेरी, अहमदाबाद अंग्रेजी (एस० एन० १३४३९ ) की माइक्रोफिल्मसे । ५३४. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती २७ जून, १९२८ प्रिय सतीशबाबू, आपका पत्र मिला। गांधीवाद विरोधी भावनाको रोकनेकी आपकी आतुरताको मैं समझता हूँ, परन्तु आपको इसका विरोध गांधीवादी भावनासे ही करना होगा और वह यह है कि आप विरोधी शक्तिको बिना प्रतिरोधके अपने आप चुक जाने दीजिए। मेरा अभिप्राय क्या है, यह मैं पत्र-व्यवहार द्वारा नहीं समझा सकूंगा। मुझे निश्चय है कि आपका काम यह नहीं है कि आप अपनी शक्ति प्रतिरोध में नष्ट हो जाने दें, बल्कि यह है कि इसे अपने रचनात्मक कार्यको सँजोनेमें लगायें । आपने जो प्रश्न उठाया है यह नया नहीं है। जब मैंने बेलगाँवमें अध्यक्षता की थी, यह उस वक्त मी उठा था और श्यामबाबू तथा कुछ एक दूसरे लोगोंके विरोधके बावजूद मैंने असहयोगियोंसे कहा था कि वे बिलकुल प्रतिरोध न करें। मुझे तबसे कोई ऐसी चीज नहीं दिखाई दी, जिससे कि मेरा विचार बदल जाता। परन्तु हमें इस सवाल पर, जब हम मिलें, तब चर्चा करनी चाहिए। जब मुझे महसूस होगा कि वक्त आ गया है, तब मैं इसपर निश्चय ही लिखूंगा । Gandhi Heritage Portal