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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५२४

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५३६. एक संशोधन कुमारी श्लेसिन, जिनका उल्लेख मैंने अपनी 'आत्मकथा 'के अध्यायोंमें किया है, किसी कन्या महाविद्यालयकी आचार्या नहीं है, बल्कि एक विद्यालय में शिक्षिका है, मैंने उन्हें आचार्या बताया है। इस भूलसे उन्हें दुःख हुआ है। इसका मुझे खेद है। मैं निस्संकोच कह सकता हूँ कि इस मूलके लिए वे किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं है। [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २८-६-१९२८ ५३७. पर्दा दूर हुआ समझो बिहारके कई एक अत्यन्त प्रभावशाली पुरुषों और करीब उतनी ही महिलाओंके हस्ताक्षरसे युक्त एक तर्कसंगत अपील अभी हाल ही में बिहारमें निकली है जिसमें पर्दा पूरी तरह हटा देनेकी सलाह दी गई है । उसपर कोई पचाससे भी अधिक महिलाओंने हस्ताक्षर किये हैं, इस तथ्यसे यह जाहिर है कि अगर जोरोंसे काम चलता रहा तो बिहारमें पर्दा एक पुरानी कहानीके रूपमें ही रह जायेगा । यह भी उल्लेखनीय है कि हस्ताक्षर करनेवाली महिलाएँ अंग्रेजियतके रंगमें रंगी हुई नहीं, बल्कि धर्मपरायण हिन्दू महिलाएँ हैं। इस अपीलमें निश्चयपूर्वक कहा गया है कि : हम यह चाहते हैं कि हमारे प्रान्तको महिलाएँ घूमने-फिरने और सामाजिक जीवनमें सब तरहसे न्यायोचित भाग लेनेमें कर्नाटक, महाराष्ट्र और मद्रासकी बहनोंकी तरह स्वतन्त्र हों। परन्तु उनका यह रहन-सहन पूरी तरहसे भारतीय ढंगका होना चाहिए और उसे अंग्रेजीयत लाने की सब कोशिशों से बचना चाहिए। क्योंकि जहाँ हम यह महसूस करते हैं कि महिलाओंपर लादे गये एकान्तवासको पूरी तरह अंग्रेजी रहन-सहनमें बदलने का अर्थ होगा -- खजूरसे गिरा झाड़में अटका वहाँ हम भी महसूस करते हैं कि यदि हम चाहते हैं कि हमारी महिलाएँ भारतीय आदर्शोंके अनुरूप उन्नति करें, तो पर्दा अवश्य हट जाना चाहिए। यदि हम यह चाहते हैं कि वे हमारे सामाजिक जीवनमें शोभा और सौन्दर्य लायें और इसके नैतिक स्तरको ऊँचा उठायें, यदि हम चाहते हैं कि वे घरकी कुशल प्रबन्धक हों, अपने पतियोंकी सहायक सहचरियाँ हों और समाजकी उपयोगी सदस्य हों, तो पर्दा जैसा कि यह इस वक्त मौजूद है अवश्य हट जाना चाहिए। वास्तवमें उनके कल्याणके लिए तबतक और कोई गम्भीर कदम नहीं उठाया जा १. भाग ४, अध्याय २२ । Gandhi Heritage Portal