५३९. पत्र : मथुरादास त्रिकमजीको आश्रम [ ३० जून, १९२८ ] मुझे लगता है कि बारडोलीके बारेमें अब सरकार समझौता करके ही छूट सकती है। मुझे 3 मिल गया है। उसने यह वचन तो दिया था कि हमारी माँगको कम करनेके लिए वह कोई कदम नहीं लेगा। इस समय क्या हो रहा है इसकी खबर नहीं है। किन्तु सत्याग्रहके मूल में ही लोगोंकी हिम्मत, दृढ़ता और शान्तिकी कसौटी है न ? [ गुजरातीसे ] बापुनी प्रसादी ५४०. पत्र : ताराबहन जसवानीको ३० जून, १९२८ चि० ताराबहन, तुमने रंगून पहुँचनेके बाद बिलकुल पत्र नहीं लिखा । तुम्हें पेटीवाला चरखा भेजने के लिए दीवालीने लिखा है, वह भेजनेके लिए कह दिया है। वहाँ एक चरखा तो होना ही चाहिए। तबीयत ठीक रहती है न ? खूब परिश्रम करते रहनेकी जरूरत है । इन दिनों यहाँ आश्रममें बहुतसे फेरफार हो गये हैं । गुजराती (जी० एन० ८७८२) की फोटो- नकलसे । १. साधन-सूत्र के अनुसार । २. नाम यहाँ नहीं दिया जा रहा हैं । बापूके आशीर्वाद Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५२७
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