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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५३२

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५०० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय करता है और इसे अन्तर्राष्ट्रीय मामला कभी नहीं बनाया जा सकता । अहिंसात्मक संघर्ष में विदेशोंसे कोई ठोस मदद पाना कदाचित् सम्भव भी हो, किन्तु वह आसान नहीं है । उस संघर्षकी कल्पना संगठन और कार्यान्वयन सर्वथा आत्मनिर्भरताके आधार पर किये जाने चाहिए। ऊपरी नैतिक मदद हमें विदेशोंसे मिल सकती है। यह हमें विदेशों में या स्वदेशमें किये गए प्रचारसे नहीं मिलेगी। यह मदद उसी हद तक मिलेगी जिस हदतक हम ठोस रचनात्मक कार्य करेंगे और अपनी आन्तरिक शक्ति बढ़ायेंगे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १-३-१९२८ परिशिष्ट २ वी० एस० श्रीनिवास शास्त्रीका समुद्री तार मेरिब्जवर्ग २४ अप्रैल १९२८ गांधी, साबरमती । गोपनीय जोहानिसबर्गसे द० आ० भा० स० के समुद्री तारसे आप बेकार चिन्तित हो गये । नेटाल कांग्रेस नेता इसका अनुमोदन नहीं करते। उनकी मन्शा निश्चित प्रश्न पूछना ही था। क्या स्मट्ससे हुए आपके समझोतेका यह भी अंग था कि उस समय प्रमाणपत्र रखनेवालों पर, चाहे उन्होंने प्रमाणपत्र चालबाजीसे हासिल किये हों, आपत्ति नहीं उठाई जानी चाहिए ? यदि ऐसा हो तो, मैं नहीं समझ सकता कि सरकारने १९१५ में माफी योजना क्यों प्रकाशितकी और पहली अगस्त १९१० के पहले से प्रवेश पाये लोगोंको संरक्षणके कागजात देते हुए उसे १९१६ तक क्यों जारी रखा । ऐसा लगता है कि पोलकने सच्चे दिलसे सलाह दी थी कि प्रस्तावका पूरा लाभ उठाया जाये; लेकिन केवल कुछ ही लोगोंने वैसा किया। विभाग इस बात के लिए राजी है कि एक बार माफ कर दिये गये लोगोंको अब फिर माफीकी अर्जी देनेकी जरूरत नहीं है । लेकिन ट्रान्सवाल कांग्रेस के नेता मांग करते हैं कि १९१४ के समझोतेके वक्तके छलपूर्ण प्रमाण-पत्रोंपर कोई आंच नहीं आनी चाहिए चाहे उनके रखनेवालोंने १९१५ की विज्ञप्लिके अधीन माफी हासिल की हो या नहीं। यदि आपके साथ हुए समझोतेका यह अंग था तो कृपया तुरन्त वैसा तार दीजिए । मलान, श्मिट, वेन और प्रिंगको जहांतक मैं निजी तौरपर जानता हूं, मैं पूरे विश्वाससे कह सकता हूँ कि इस समय उनके इरादे नेक हैं। वे जानबूझकर पहले वायदे से मुंह नहीं मोड़ेंगे। १. दक्षिण आफ्रीकी भारतीय समिति । Gandhi Heritage Portal