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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५३३

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परिशिष्ट ५०१ जहांतक परिवारोंके प्रवेशका सम्बन्ध है, १९१४ से पहले परिवारोंके बिना प्रवेश करनेवालोंकी संख्या अब भी कम ही होगी। इस बात के लिए भी कोई एक दलील नहीं है कि यदि १९१४ के बाद चालबाजीसे प्रवेश करनेवाले बिना परिवारोंके रहते हैं तो १९१४ से पहलेवालोंको उस अपात्रतासे क्यों बरी कर दिया जाना चाहिये। विभाग पूछता है कि १९१४ से पहले नेटाल और केपमें छलसे प्रवेश करनेवालोंके साथ ट्रान्सवालमें उसी प्रकारके लोगोंकी अपेक्षा बुरा बर्ताव क्यों किया जाना चाहिए। उन्हें यह भी आशंका है कि इन प्रान्तोंमें कोई पंजीयन प्रमाणपत्र न होनेसे किसी भी व्यक्तिके लिए यह कहना आसान है कि वह १९१४ से पहले आया है। स्मरण रहे कि इससे पहले कि धारा ५ किसीके विरुद्ध लगाई जा सके, जालसाजी प्रमाणित करनेका भार सरकार पर होगा। यह सच नहीं है कि संरक्षण प्रमाणपत्रोंके बदले में पंजीयनके तथा अन्य प्रमाणपत्र दे दिये जाने चाहिए। स्पष्ट व्यवस्था द्वारा सम्बद्ध पक्षोंको ये दस्तावेज रखने की अनुमति दी गई है। यह सच है कि संरक्षण प्रमाणपत्र १९१३ के उस प्रवास कानून की धारा २५ के अधीन उस विनियममें आ जायेंगे जो अस्थायी परमिटोंके लिए अनुमति प्रदान करता है। विभागोंको कानून अधिकारियों द्वारा सलाह दी जाती है कि धारा २५ के अधीन स्थायी परवानों पर मंत्री प्रतिबन्धात्मक शर्तें नहीं लगा सकते; लेकिन यदि परवाने अस्थायी हों तो वैसा कर सकते हैं । प्रस्तावित संरक्षण प्रमाण-पत्रोंमें एक वायदा है कि जबतक प्रमाण-पत्र रखने वालों पर निर्वासन योग्य अपराध करनेका जुर्म न हो तबतक मंत्री उन्हें रद नहीं करेंगे। विभाग का तर्क है कि यह व्यवस्था वास्तव में प्रमाण-पत्रोंको स्थायी बना देती है । प्रमाणपत्रके स्वरूपका प्रश्न अब भी विचाराधीन है और यदि मौजूदा स्वरूप पर कानूनी राय विपरीत हो तो उस दशामें मुझे विभागसे सन्तोषप्रद व्यवहारकी आशा है। मैंने डाकसे लम्बा स्मरण-पत्र भेजा है। जबतक आप उसे पढ़ न लें तबतक के लिए कोई निष्कर्ष न निकालें । मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि यह माफी योजना निष्क्रिय प्रतिरोध संघर्षके परिणामोंको किस प्रकार विफल बनाये दे रही है। कृपया इस समुद्री तार तथा द० आ० भा० स० के समुद्री तारकी प्रति तथा आपके और मेरे बीच जिस तारका आदान प्रदान हुआ है उसकी प्रति भी सर मुहम्मद हबीबुल्लाको डाकसे भेज दीजिए । शास्त्री अंग्रेजी (एस० एन० ११९७४) की फोटो - नकलसे । Gandhi Heritage Portal