परिशिष्ट ३ बारडोलीका मामला क्या है ? हाल के वर्षोंमें लगान संशोधन समझौतोंके मामले में आम रायकी और विधान परिषदके प्रस्तावोंकी जानबूझ कर उपेक्षा की गई है। संयुक्त संसदीय समितिकी यह सलाह मानते हुए कि " भूमिकरके निर्धारणमें संशोधन करनेकी प्रक्रिया अधिनियम द्वारा विनियमके और करीब लाई जानी चाहिए, बम्बईकी विधान परिषदने मार्च १९२४में भारी बहुमत से इस आशयका एक प्रस्ताव पास किया है कि भूमिकरका संशोधन विधान द्वारा विनियमित करनेके प्रश्न पर गौर करनेके लिए एक समिति नियुक्त की जाए और जबतक उक्त कानून अमलमें नहीं लाया जाता तबतक नये सिरे से कोई तखमीना न बनाया जाये और संशोधित समझौता भी लागू न किया जाये।” सरकारने प्रस्तावका पहला भाग भूमिकर तखमीना समिति नियुक्त करके कार्यान्वित कर दिया, परन्तु दूसरे हिस्सेकी उपेक्षा कर दी गई और प्रस्तावका विरोध करते हुए एकके बाद एक ताल्लुकेका फिरसे तखमीना बनाया जाने लगा। इसी बीच भूमि कर समितिकी बैठक हो चुकी थी और उसने अपनी रिपोर्ट प्रकाशित कर दी थी । बम्बई विधान परिषदने मार्च, १९२७ में भारी बहुमत से एक और प्रस्ताव पास किया जिसमें सपरिषद गवर्नरसे सिफारिश की गई थी कि भूमिकर तखमीना समितिकी रिपोर्टको ध्यान में रखते हुए जरूरी कानून बनाकर मार्च १९२४ के प्रस्तावको तत्काल अमलमें लाया जाए और जबतक ऐसा कानून न बने सम्बद्ध भूमिकर अधिकारियोंको आदेश जारी किये जायें कि १५ मार्च १९२४ के बाद बढ़े हुए करकी उगाही न करें। भूमिकर तखमीना समिति द्वारा सुझाया गया कानून इस समय विधान परिषदके सामने है लेकिन अन्ततोगत्वा कानून बन जाने पर उसका उद्देश्य ही विफल हो जाये - इस उद्देश्य से लगभग जानबूझकर संशोधनकी व्यवस्था की जाती रही है। बारडोली ऐसे कई ताल्लुकोमेंसे केवल एक है, जहाँ इन प्रस्तावोंके अनुसार करोंमें कोई संशोधन नहीं होना चाहिए था और करोंके कोई नए दर लागू नहीं किये जाने चाहिए थे। इस मामलेके गुणदोष पर ध्यान न दिया जाए तो भी यह आपत्ति बारडोलीमें भूमिकर संशोधन व्यवस्था पर सैद्धान्तिक मूल आपत्ति है । मैं इस मामलेके गुण-दोषोंकी चर्चा संक्षेपमें करूंगा । बारडोलीकी नई भूमिकर संशोधन व्यवस्था श्री जयकर द्वारा तैयार की गई थी, जिन्होंने नवम्बर, १९२५ में अपनी सिफारिशें पेश कर दी थीं। उन्होंने ३० प्रतिशत बढ़ोतरीकी सिफारिश की थी। बन्दोवस्त आयुक्त श्री ऐन्डरसन उस आधारसे असहमत थे जिस पर श्री जयकरने अपनी सिफारिश पेश की थी; और उन्होंने एक नया आधार अपनाकर २९ प्रतिशतकी बढ़ोतरीकी सिफारिश की। सरकार दोनों ही व्यक्तियोंकी सिफारिशोंसे असहमत थी और उसने लगानकी २२ प्रतिशत बढ़ोतरी तय की। ताल्लुकेका पहलेका लगान जो ५,१४,७६२ रु० था वह नये कर निर्धारणके अन्तर्गत ६,२०,००० रु० से कुछ ऊपर है । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५३४
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