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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५३६

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५०४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय श्री जयकरकी रिपोर्टके सबसे महत्वपूर्ण अंशको हो, अर्थात् जिसपर वे कुल उपजके मूल्य पर अपनी सिफारिशें आधारित करते हैं, 'निरर्थक' और 'सर्वथा खतरनाक कहकर रद कर दिया, 'क्योंकि उन सिफारिशोंमें उनके सुझावोंका कोई औचित्य नहीं मिलता, बल्कि उनसे विरुद्ध तर्कोका आभास मिलता है। इन हालात में श्री एन्डरसनका स्पष्ट कर्तव्य था कि सरकारको नये सिरेसे जाँच पड़ताल करनेका सुझाव देते। लेकिन उन्होंने लक्ष्यका अतिक्रमण कर दिया और उन्होंने दरोंके आंकडोंके आधार पर अपनी सिफारिशें दे दी। यह एक ऐसा आधार है जिसके औचित्यपर कई उच्च पदासीन सरकारी अफसरोंने भारी आपत्ति की है और प्रस्तुत मामलेमें आंकड़ोंपर भी इस आधार पर कि उनकी जांच नहीं की गई है, भारी आपत्ति की है। यदि श्री जयकरने कोई वास्तविक जाँच-पड़ताल न करके सैटलमेंट मैनुअलका मजाक उड़ाया है तो श्री एन्डरसन एक कदम आगे बढ़ गये हैं। उन्होंने सैटलमेंट मैनुअलका उल्लंघन किया है। सैटलमेंट मैनुअलमें लिखा है कि विचारणीय मुद्दोंमें किरायोंको आधार मानना अनेकमें से एक मुद्दा है और 'उनके आधार पर विचार करें भी तो जबतक उनका परिणाम काफी न हो और जबतक उनकी विश्वसनीयता प्रमाणित न हो जाये उन्हें निश्चित निर्णयोंका आधार नहीं बनाया जा सकता।' किरायेके आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा रखकर और (२) यह मानकर कि उनके महत्वपूर्ण होनेके लिए अपेक्षित दोनों शर्तें पूरी हो गई हैं श्री एन्डरसनने भारी गलती की। श्री एन्डरसन एक जगह श्री जयकर पर यह दोष लगाते हैं कि उन्होंने किराये पर उठाये क्षेत्र और खुद मालिकों द्वारा जोते गये क्षेत्रोंके आँकड़े इकट्ठा करनेका कोई प्रयत्न नहीं किया और फिर भी वह परिशिष्ट 'एच' पर गलतीसे इस निष्कर्ष पर पहुँच जाते हैं कि 'कुल क्षेत्रका कमसे-कम आधा भाग उन जमींदारोंके पास है जो स्वयं खेती नहीं करते। उनकी भूलका आधार यह है कि जो उन्होंने जल्दबाजी में सात सालके आँकड़े, ४२९२३ एकड़, एक सालके आँकड़े मान लिये और २३९९५ एकड़ अर्थात् कुल क्षेत्रकी लगभग १८ प्रतिशत जमीन जो किसानोंके अपने पास है, उसके बारेमें श्री जयकरके अनुमानकी नितान्त उपेक्षा कर दी। श्री जयकरका अनुमान भी यद्यपि ऊपरसे सही दिखता है तथापि बिलकुल सही नहीं है, क्योंकि यह मौके पर की गई जाँचपर आधारित नहीं है । इन कारणोंसे श्री जयकर और श्री एन्डरसन दोनोंकी रिपोर्ट बेकार हैं और सरकार द्वारा २२ प्रतिशतकी दर सर्वथा मनमाने तौर पर नियत की गई है क्योंकि वह किन्हीं नये या सही आंकड़ों पर आधारित नहीं है । इसलिए बारडोलीके सत्याग्रहियोंने तबतक कोई लगान न देनेकी शपथ ली है जबतक या तो १. बढ़ोतरी रद नहीं कर दी जाती, या 8441 २. पूरे मामलेकी जांच करनेके लिए स्वतन्त्र निष्पक्ष न्यायाधिकरणकी नियुक्ति नहीं की जाती । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १४-६-१९२८ संभावय. Gandhi Heritage Fortal