विष्णु, ८१, ४०९ वीरूमल बेगराज, ३११ वेंकटप्पैया, १९ वेज, एस० ए०, २२० वेद, ५४, ९४, ४४३ वेदालंकार, धर्मवीर, ३४१ वेन, २२५, २७० वेन, एच० एन०, १६० वेरीजिन, पीटर पी०, २६१ पा० टि० वेलॉक, विल्फ्रेड, ६० वेस्ट, देवी, ४२, ४७१ वोरा, चिमनलाल, ३९० शंकर, १२२ श शंकरन्, २२३, २६३, ३३०, ४५६ शंकरनाथ, लाला, ३४१ शंकरभाई, ४३६, ४५४ शरमन, श्रीमती, १४० सांकेतिका शरीर; - के लिए ब्रह्मचर्य आवश्यक, ४८०- ८१; -राम और रावणका निवास- स्थान, ४८० शर्मा, अभयदेव, ४३६ शर्मा, हरिलाल, ४७३ शा, बर्नार्ड, ७९ शान्तिकुमार मोरारजी, १७३, १८०, २०७, २२२, ३३७, ३८७, ४७६ शान्तिदेवी, २९१ शान्तिवादी, और युद्ध, ९२ शान्ति संघ, यरूशलम, २५३ पा० टि० शारदाबहन, ३४८ शारीरिक श्रम, ४४०, ४८५ शास्त्र, -और बुद्धि ९४; और देखिए वेद ५२९ शास्त्री, वी० एस० श्रीनिवास, १७, ६८, २००, २२९, २४८, २७५, २८६, २८७, ३०५ पा० टि०, ३५४, ३७१, ३८६, ३९५; -का दक्षिण आफ्रिकामें कार्य, ६१, ६५ शाह, चिमनलाल नरसिंहदास, ४२९ शाह, फूलचन्द के०, ७४, २४४, ३३९ शिक्षक; -का शिक्षामें कार्य, ४०५-६; - शिक्षा के लिए पुस्तकोंका प्रयोग न करें, १७८ शिक्षा, -औद्योगिक, ४४३; - धार्मिक, ४०६; -बालकोंकी, ३८३; -का उद्देश्य, ३५९; -पर मैकॉलेके विचार, १६८; -पुस्तकोंके बिना, १७८; -प्रणालीको बदलनेकी जरूरत, ४१७- १८; -महाविद्यालयकी, ४४३ - में कर्मकाण्डकी विधियोंका ज्ञान आवश्यक नहीं है, ४४२; - में शिक्षकका काम, ४०५-६ - विभिन्न वर्णोंके लिए, ४४२; - सबके लिए समान होनी चाहिए, ४४२ शिक्षा प्राथमिक, ३३६, ३४६-४७ -और विनय मन्दिरोंका शिक्षाका क्रम, ३६३- ६४; को अनिवार्य बनाना, ४०५; - में पाठ्य-पुस्तकोंका उपयोग, ३३५- ३६, ३६४-६५, ४०५-६ शिव, (भगवान), ४०९ शिवलालभाई, २७१ शिवानन्द, ३३९ शैतान, २८ शैलेक, एलिस, १३५, २१९ श्याम बाबू, ४९० Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 36.pdf/५६१
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