चन्दा, श्रीयुत घनश्यामदास बिड़लाको, ८, रायल एक्सचेंज प्लेस, कलकत्ताके पतेपर भेजा जाना चाहिए। बिड़लाजीने कृपापूर्वक कोषका मन्त्री तथा कोषाध्यक्ष बनना स्वीकार कर लिया है ।
मु० अ० अन्सारी
मदनमोहन मालवीय
घनश्यामदास बिड़ला
मैंने कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा जारी की गई वह अपील भी देखी है, जिसमें उन्होंने इस महीनेकी २९ तारीखको स्वर्गीय लालाजीके स्मृति दिवसके रूपमें मनानेका अनुरोध किया है । मैं इन दोनों अपीलोंका हृदय से अनुमोदन करता हूँ और विश्वास करता हूँ कि देशभर में सभाएँ की जायेंगी, जहाँ प्रस्तावित स्मारकके लिए चन्दा इकट्ठा किया जायेगा। यदि सभी लोक-सेवी जन यह संकल्प कर लें कि अपीलपर हस्ताक्षर करनेवाले उन मान्य सज्जनोंने पाँच लाख रुपयेकी जो न्यूनतम राशि देनेको कहा है, वह सारीकी सारी स्मृति दिवसपर ही एकत्र कर लेनी है तो यह लालाजीके प्रति हमारे प्रेमका प्रभावशाली प्रमाण होगा ।
मैं जानता हूँ कि ऐसे बड़े कार्यको संगठित करने के लिए अब समय बहुत कम बच रहा है; लेकिन जहाँ सारे लोग एक मन होकर एक ही उद्देश्यके लिए जुट जायें, वहाँ समयकी कमी कोई बाधा नहीं है । लोग जरा १९२०-२१ के उन शानदार दिनोंकी याद करें जब एक ही दिनमें पाँच लाख क्या, १० लाख रुपये इकट्ठे किये गये थे। आखिरकार एक करोड़ रुपयेका लक्ष्य लगभग एक ही महीने में तो पूरा कर लिया गया था । यदि विश्वस्त स्वयंसेवक २९ तारीखको सिर्फ इस कामके लिए अलग कर लें और चन्दा इकट्ठा करनेके काम में जुट जायें तो इस रकमको प्राप्त करनेमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
चन्दा इकट्ठा करनेवालोंको यह याद रखना चाहिए कि उन्हें इकट्ठी की गई रकम तुरन्त ही अपील में दिये गये पतेपर सेठ घनश्यामदास बिड़लाको भेज देनी होगी। यदि उगाही करनेवाले मुझे अपना-अपना नाम भेजते हुए यह सूचना दे देंगे कि उन्होंने चन्देकी रकमें श्रीयुत बिड़लाको भेज दी हैं, तो मैं इस बातका ध्यान रखूंगा कि उनके नाम और चन्देकी राशियाँ 'यंग इंडिया 'में विधिवत् प्रकाशित हो जायें। वे चन्देकी रकमें सीधे 'यंग इंडिया के कार्यालय में भी भेज सकते हैं, जहाँसे वे कोषाध्यक्षको भेज दी जायेंगी । लेकिन यदि, हमारी वर्तमान विशृंखल अवस्थाको देखते हुए एक दिनमें सारी रकम इकट्ठा करनेका काम हमें अपनी सामर्थ्य से बाहर लगे तो चन्दा-संग्रह समितिको यह तिथि आगे बढ़ा देनी चाहिए ।
चूँकि कोई निश्चित नियम नहीं है, इसलिए मेरा सुझाव है कि प्रत्येक जिला अथवा ताल्लुका अपनी आबादीके मुताबिक अपने हिस्सेका चन्दा खुद तय कर ले । कमसे कम इतना तो करना ही चाहिए। सीधा तरीका तो यह है कि प्रत्येक जिला,