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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/१३७

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पत्र : किशनचन्द भाटियाको

तक वे अपने कार्यकर्त्ताओंसे यह काम लेते रहे थे। मुझे आशा है कि अन्त्यज भाई- बहन इस बातको नहीं भूलेंगे ।

मैं आशा करता हूँ कि स्मारक किसी दूसरे हेतुसे बनाया जाता तो अधिक अच्छा होता या अधिक रुपया आता, इस प्रकारकी आलोचना करनेमें कोई अपना समय न खोयेगा । इस संसारमें मनुष्यका किया कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता । उसमें आलोचनाके लिए सदा अवकाश रहता है । किन्तु कोई अच्छा कार्य आरम्भ होनेपर उसकी आलोचनामें समय नष्ट करना अथवा स्मारककी योजना अपनी पसन्दकी न होनेसे उसके लिए रुपया न देना उचित नहीं माना जा सकता । लालाजीका स्मारक अखिल भारतीय होना चाहिए। और जो यह मानते हैं कि उसकी कल्पना और अपील करनेवाले लोग योग्य हैं, उनका कर्त्तव्य है कि वे कोषमें स्वयं यथाशक्ति रुपया दें, दूसरोंसे दिलायें और उसके बाद देशके दूसरे काममें लगें ।

[ गुजरातीसे ]
नवजीवन, २-१२-१९२८

११९. तार : श्रीनिवास आयंगारको[]

सत्याग्रहाश्रम, वर्धा
२७ नवम्बर, १९२८

अन्सारी, मालवीयजी और बिड़ला के हस्ताक्षरों से लालाजी स्मारक के लिए अपील जारी कर् दी गई है ।[] कृपया २९ तारीखको चन्दा इकट्ठा करनेकी व्यवस्था करें।

गांधी

अंग्रेजी (एस० एन० १३३४३) की फोटो-तकलसे ।

१२०. पत्र : किशनचन्द भाटियाको

सत्याग्रहाश्रम, वर्धा
२७ नवम्बर, १९२८

प्रिय लाला किशनचन्द,

श्रीयुत बैंकरने मुझे आपके उस पत्रकी[] प्रति भेजी है, जिसमें आपने खादीकी फेरी लगाने और चन्दा इकट्ठा करनेके लिए लाजपतराय सप्ताह निश्चित करनेकी

  1. १. यह तार जवाहरलाल नेहरू, राजेन्द्रप्रसाद और जयरामदास दौलतरामको भी भेजा गया था।
  2. २. देखिए "अपील: लाजपतराय स्मारक कोषके लिए", २६-११-१९२८।
  3. ३. तारीख २१ नवम्बर, १९२८ के ।