सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/१४२

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
१०८
सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

बा मनुके विषय में चिन्ता करती रहती है। उसके बाल कौन घोता-सँवारता है । उसके कपड़ोंका क्या होता है, आदि अनेक प्रश्न करती है। इन सबमें तुम या कोई और मदद करता होगा -- ऐसा मैंने बा से कहा है ।

सरोजिनी देवी अपने हिस्सेका काम करती ही होगी। क्या वह प्रसन्न रहती है ?

मेरा एक रूमाल वहाँ रह गया है । प्रभावतीको मालूम होगा। देख लेना । अगर मिल जाये तो सँभाल कर रख लेना ।

स्वास्थ्य ठीक न रहे यह तो उचित नहीं है ।

सूरजबनके[] लिए मैंने तो तुरन्त तार भेज दिया था । किन्तु वह क्यों नहीं मिला, यह तो ईश्वर ही जाने ।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी० एन० १८५४) की फोटो-नकलसे ।
 

१२५. पत्र : छगनलाल जोशीको

२७ नवम्बर, १९२८

भाईश्री छगनलाल,

तुम्हारे दोनों पत्र मिल गये हैं । चि० संतोक जो अनाज दे उसका पैसा उसे नहीं मिल सकता । यह अनाज तथा और भी जो अनाज उसके पास हो, वह आश्रम-की सम्पत्ति है । यह बात चि० रुखी वगैरहको धीरजपूर्वक समझाना या नारणदाससे‌समझानेको कहना । अगर सत्यके साथ प्रेमका मिश्रण होगा तो तुम्हारा निर्णय ठीक ही होगा। लेकिन भूल होनेके भयसे अपना धर्म न छोड़ना ।

नारणदासके यहाँसे लोग निकलते जा रहे हैं । वहाँ बदलेमें और लोगोंको रखना हो तो रखना। तुम दोनों एक-हृदय हो सको, यह बहुत आवश्यक है । कैसे हो सकते हो, यह तुम जानो ।

... [] बहनके विषय में तुम जो लिख रहे हो वैसा तो गंगाबह्नने मुझसे कभी कुछ कहा नहीं । तुमने जो लिखा है, उसने तो मुझे चौंका दिया है। इस सबके बावजूद हमें निर्लेप रह कर बहनोंकी सेवा करनी है । श्रीपतराव रह जायें तो बहुत अच्छा हो । दूधके सम्बन्धमें कल लिखनेका विचार है । आज घीका इन्तजाम कर रहा हूँ । लेकिन, अभी कुछ पक्का नहीं है ।

बापूके आशीर्वाद

[ गुजराती से ]
बापुना पत्रो : श्री छगनलाल जोशीने
  1. १. एक महिला जो कृष्णदास चितालियाकी मारफत आश्रमके जीवनका अनुभव करने आई थी।
  2. २. साधन-सूत्रमें नाम नहीं दिया गया है।