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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/१४३

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१२६. पत्र : छगनलाल जोशीको

मंगलवार [ २७ नवम्बर, १९२८][]

भाईश्री छगनलाल,

आज मेरे पास ज्यादा लिखनेका समय नहीं है। . . . का[] किस्सा पढ़कर बहुत दुःख हुआ है । मेरा सारा दुःख ऊपरी ही होता है । इससे काममें रुकावट नहीं पड़ती। किन्तु वह मनमें घुमड़ता रहता है । उसे पत्र लिखा है । शायद तुम्हें दिखायेगा ।

तुम्हें हिम्मत नहीं हारनी है। अपने पदकी शोभा बढ़ाना । ईश्वर तुम्हारी सहायता करे

बापूके आशीर्वाद

[ गुजरातीसे ]
बापुना पत्रो : श्री छगनलाल जोशीने
 

१२७. पत्र : प्रभावतीको

२७ नवम्बर, १९२८

चि० प्रभावती,

तुमारे दोनों खत मीले हैं । द्वारिका जानेकी इच्छा है तो अवश्य जाना । मेरी गैर हाजरीका दुःख कुछ भी मत मानो। कोई रोज तो हमेशाके लीये यह शरीरका जाना है हि । उसके वियोगका दुःख क्या ? जिस कार्यके लीये हमारा जाना सार्थ है उस कार्य में परायण रहे, वही हमारा आनंद है ।

बापूके आशीर्वाद

जी० एन० ३३४१ की फोटो-नकलसे ।
  1. १. देखिए पिछला शीर्षक।
  2. २. साधन-सूत्र में नाम नहीं दिया गया हैं ।