सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/१५७

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
१२३
बम्बईका कलंक

उचित था और परिस्थितियोंका भी यही तकाजा था तथा उसके पीछे कोई व्यक्तिगत स्वार्थकी भावना या क्षुद्र उद्देश्य नहीं थे, बल्कि वह विशुद्धतम देशभक्तिसे ही प्रेरित था तब तो वे कभी भी अपने वैर-विरोधको भूल नहीं सकेंगे। यदि बात ऐसी हो तब तो पश्चात्तापका कोई कारण ही नहीं होगा । कोई किसी मृत व्यक्तिकी स्मृतिके प्रति केवल न्याय ही कर सकता है; वह मृत व्यक्ति द्वारा वास्तवमें किये गये अन्याय-की स्मृति अपने मनसे मिटा नहीं सकता । सच्चे पश्चात्तापकी अनिवार्य शर्त यह है कि व्यक्ति अपनी गलतीका कायल हो गया हो। इसलिए यदि तारके लेखक यह महसूस करते हों कि कुल मिलाकर उन्होंने लालाजीके जीवन कालमें उनके प्रति अन्याय किया या यह कि उनके विरोधके पीछे जो उद्देश्य थे वे स्वार्थको भावनासे परे नहीं थे तो पश्चात्ताप सच्चा है और उसे स्थायी होना चाहिए। इस शर्तके साथ मैं डॉ० सत्यपाल और उनके साथियोंको इस देशभक्तिपूर्ण सन्देशके लिए बधाई देता हूँ तथा आशा करता हूँ कि लालाजी द्वारा विरासत में छोड़े गये कामको पूरा करनेके लिए पंजाबमें सभी लोग मिल-जुलकर दृढ़ और अविश्रान्त प्रयत्न करेंगे । यदि पंजाबके लोग चाहें और यदि पाँच नदियोंवाले उस प्रदेशमें दलगत भावना और साम्प्रदायिकताका अन्त हो जाये तो पंजाब अनेक बातोंमें समूचे राष्ट्रका नेतृत्व कर सकता है। पंजाबके कुछ अखबार अक्सर गाली-गलौज और व्यंग वक्रोक्ति करते रहते हैं । यदि वहाँके सारे अखबार इस रवैयेको छोड़कर लोकमतको सही दिशामें प्रशिक्षित करें तो मुझे तनिक भी सन्देह नहीं कि शेष भारत उनका अनुकरण करेगा । लालाजीकी स्मृतिमें इससे बड़ा स्मारक और कुछ नहीं हो सकता कि पंजाब समस्त भारतको सही रास्तेपर चलने की प्रेरणा दे ।

[ अंग्रेजीसे ]
यंग इंडिया, २९-११-१९२८

१४१. बम्बईका कलंक

घाटकोपर सार्वजनिक जीवदया खाताके श्रीयुत नगीनदास अमूलखरायने बम्बई नगर निगमके अध्यक्षको बम्बईमें दुग्ध-आपूर्तिके सम्बन्ध में एक तर्कपूर्ण पत्र भेजा है, जो नीचे दिया जा रहा है :[]

बम्बईको सौन्दर्यस्थली कहा गया है । यदि बम्बईका अर्थ केवल मलाबार हिल और चौपाटी है और, यदि सुन्दरताका सम्बन्ध केवल उसके बाह्य रूपसे है तो बम्बई निःसन्देह सुन्दर है । लेकिन यदि बम्बईके हृदय स्थल में प्रवेश करके देखा जाये तो हमारे अधिकांश शहरोंकी भाँति बम्बई देखने में भी और यथार्थमें भी कुरूप है । नगर

  1. १. यहाँ नहीं दिया जा रहा है: पत्र-लेखकने अधिकृत व्यक्तियोंके मतोंका हवाला देते हुए दिखाया था कि दूधके ऊँचे दामोंका कारण ठोक शहरके बीच गोशालाओंका होना, चारेका महँगा होना तथा असमय पशुओंका वध किया जाना है।