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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/१७४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

एक राष्ट्रवादीके नाते ही नहीं, बल्कि मुसलमानके नाते भी चरखा चलाना आपका कर्त्तव्य है, जब भी आप यह महसूस करें कि केवल एक भारतीयके नाते ही नहीं, बल्कि एक मुसलमानके नाते भी--यदि मैंने इस्लामको ठीक समझा है तो--अपने करोड़ों देशभाइयोंके प्रति आपका यह कर्त्तव्य है, तब आप फिर चरखा संघ में शामिल हो जायेंगे।

हृदयसे आपका,

मौलाना शौकत अली
केन्द्रीय खिलाफत कमेटी
सुलतान मैन्शन्स, डोंगरी, बम्बई

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३७४४) की फोटो-नकलसे।

 

१५६. पत्र : छगनलाल जोशीको

शुक्रवार [३० नवम्बर, १९२८][]

भाईश्री छगनलाल,

आज तुम्हारा कोई पत्र नहीं मिला।

चलालाके बारेमें मैं विचार कर चुका हूँ। फिलहाल तो काम जयसुखलालके बजटके अनुसार चलने दो। मेरा मतलब यह है कि हमारे खादी विभागमें जो पैसा है उसीसे आवश्यक धन लेकर काम चलाया जाये। यह पैसा चलालाके खाते में डाल दें या हमारे पास अमरेलीकी जो खादी पड़ी है उसमें से वसूल करें। यदि वह खादी तत्काल बिक जाये तो हमें पैसा नहीं देना पड़ेगा। इसलिए मुझे तो अभी इतना ही निर्णय करना है कि चलालाके काम में आगामी वर्षतक ८०० रुपयेकी हानि होती हो तो उसकी चिन्ता न करें। यह हानि अमरेलीकी खादीसे भरनी होगी। उसे चलालाकी खादीकी दरें बढ़ाकर पूरा नहीं करना है। इससे ज्यादा जिम्मेदारी लेनेकी बात सामने आये तो मुझसे पूछना।

यदि आश्रम में श्रीपत रावकी जरूरत हो तो उसे जरूर बुला लेंगे।

यहाँ आश्रमवालोंने कल लालाजीके स्मारकके लिए मजदूरीकी और आजसे वे सात दिनके लिए गुड़ छोड़ेंगे। प्रातःकाल प्रत्येक व्यक्तिको काँजीमें तीन तोले गुड़ दिया जाता है। अब गुड़के बदले नमक डाल रहे हैं।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (एस॰ एन॰ १४८२२) की माइक्रोफिल्मसे।

  1. आश्रमवासियों द्वारा २९ नवम्बरका लाला लाजपतरायकी स्मृतिमें की गई मजदूरी के उल्लेखसे।