१७३. तार : फ्री प्रेस और एसोसिएटेड प्रेसको
[३ दिसम्बर, १९२८][१]
- फ्री प्रेस, एसोसिएटेड प्रेस
- बंगाल समितिके निर्णयको देखते हुए गांधीजीकी सलाह है कि इतने थोड़ेसे बचे समय में जो भी खादी संस्थाएँ कांग्रेस प्रदर्शनीमें भाग ले सकती हों, अवश्य लें।
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३३१९) की फोटो-नकलसे।
१७४. पत्र : डॉ॰ वि॰ च॰ रायको
सत्याग्रहाश्रम, वर्धा
३ दिसम्बर, १९२८
आपका पत्र पढ़कर अफसोस हुआ। विचित्र बात है कि उलटे आप मुझपर आरोप लगाते हैं कि मैंने समितिके साथ समुचित व्यवहार नहीं किया, जब कि आरोप मुझे लगाना चाहिए था। मैं तो यह समझ रहा था कि मैंने समितिकी भावनाओंका अधिकसे-अधिक ख्याल रखा है और इसकी कोशिशमें खुदकी अपनी भावनाओंको दबा कर रखा है। समितिको कहीं ऐन वक्तपर बुरा न लगे, इसी ख्यालसे मैंने आपका ध्यान जबरन इसकी ओर आकर्षित किया और आप सबके साथ इसपर बहस करनेकी कोशिश की है, जिससे कि आप बादमें अपनी पसन्दका फैसला ले सकें और मुझे समाचारपत्रोंमें उसकी आलोचना भी न करनी पड़े।
अच्छा अब कामकी बात। यदि प्रकाशित विवरणोंमें सच्चाई है तो आपके पत्रमें नहीं है। एक मजेदार खबर लीजिए। प्रदर्शनी अधिकारियोंने सभी प्रान्तीय मण्डल सरकारोंसे चीजें भेजनेका अनुरोध किया है। लेकिन आपको शायद जानकारी नहीं है कि क्या हुआ है।
और पण्डितजीकी इच्छाके आगे इतना अधिक झुकना भी मुझे पसन्द नहीं आया। मैंने वचन दे दिया है कि मैं हर हालत में कांग्रेस अधिवेशन में शरीक होऊँगा। समिति व्यक्तिगत सुविधाओं और विचारोंसे ऊपर उठकर अपनी एक नीति निर्धारित क्यों नहीं करती? मैं प्रदर्शनी में शरीक नहीं हुआ या अखिल भारतीय
- ↑ देखिए "पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको", ३-१२-१९२८ ।