आयेंगे तो सही। मगर चूँकि मैं जानता हूँ कि वे हमेशा काममें लगे रहते हैं, इसलिए जहाँतक होता है मैं उनपर ज्यादा बोझ नहीं डालता।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (जी॰ एन॰ ३६८३) की फोटो-नकलसे।
१७८. पत्र : महादेव देसाईको
मौनवार [३ दिसम्बर, १९२८][१]
तुम्हारा पत्र मिल गया है। तुम तो [उद्योग] मन्दिर में जितना करते थे उससे भी ज्यादा बड़े काममें लगे हो। उसमें सफलता मिल रही है, इससे मुझे सन्तोष है। जब पत्र लिख सको तब लिखना।
हारकरका लेख[२] छापनेके लिए भेज दिया है। उसने 'यंग इंडिया' के बारेमें पूछा है। उसका जवाब तुम्हीं दे देना।
बाकी समाचार तुम्हें प्यारेलाल और सुब्बैया लिखते होंगे। उसीसे सन्तोष कर लेना।
तुम्हारी टिप्पणी मैंने पढ़ ली है। उसमें कही गई बात समझमें आ गई है। तुम लिखते या कातते नहीं हो, तो उसका मुझे दुःख नहीं है। अगर मैं यह मानूँ कि तुम आलस्यवश कोई काम नहीं कर रहे हो तो दुःख होगा। सच्चा मनुष्य काम करे तो भी ठीक है और न करे तो भी ठीक है। तुम्हें मैं सच्चे मनुष्यों में गिनता हूँ।
बापूके आशीर्वाद
साथका पत्र मणिलाल जहाँ हो, वहाँ भेज देना।
गुजराती (एस॰ एन॰ ११४४५) की फोटो-नकलसे।