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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२०९

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१९८. पत्र : निरंजन पटनायकको

वर्धा
६ दिसम्बर, १९२८

प्रिय निरंजन बाबू,

मैंने सम्बलपुरके बारेमें आपको आज एक तार भेजा है। मैं यहाँसे 'पेसेन्जर' गाड़ीसे २० को चल कर २१ की शामको सम्बलपुर पहुँचूँगा और २२ की शामको वहाँसे चल दूँगा। मेरी सुख-सुविधाके लिए कोई ज्यादा तैयारी करनेकी जरूरत नहीं। हाँ, बकरीका दूध अवश्य सुलभ रहे। कलकत्तासे फल लानेकी कोई जरूरत नहीं।

म अब श्रीयुत जेठालाल गोविन्दजीके पत्रका अनुवाद आपके पास भेज रहा 'यंग इंडिया' के स्तम्भोंके माध्यमसे आप उनसे परिचित हैं ही। वे आत्म-निर्भरता योजनासे सम्बन्धित बिजोलिया केन्द्रके व्यवस्थापक हैं। मैं चाहता हूँ कि आप उनके पत्रको उन आँकड़ोंके साथ रख कर पढ़ें जो आपने अपने एक पत्र में दिये थे और जिन्हें मैंने 'यंग इंडिया' में[] प्रकाशित किया था। आप मुझे बतलाइए कि उन्होंने कहाँ गलती की है।

हृदयसे आपका,

सह-पत्र १

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३७६२) की माइक्रोफिल्मसे।

 

१९९. पत्र : सतीशचन्द्र दासगुप्तको

वर्धा
६ दिसम्बर, १९२८

प्रिय सतीश बाबू,

प्रदर्शनीके सम्बन्धमें मेरा तार[] आपको मिला होगा। अब तो बात खतम हो चुकी है। आप जितना कर सकते हैं, करेंगे। पता नहीं वे आपको अपने ढंगसे काम करनेकी छूट देंगे या नहीं।

मैं २१ तारीखको सम्बलपुर पहुँच रहा हूँ और २२ को वहाँसे चलकर मेल द्वारा २३ को कलकत्ता पहुँच जाऊँगा। मुझे जीवनलालके साथ ठहरना पड़ेगा। पण्डितजी

  1. देखिए खण्ड ३७, १४ २४४-४६।
  2. देखिए "तार : सतीशचन्द्र दासगुप्तको", ३-१२-१९२८।