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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२१०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

चाहते हैं कि मैं २३ के बाद कलकत्तामें मौजूद रहूँ और मैं अपनी शक्तिभर उनकी सहायता करना चाहता हूँ। उनके सिरपर भारी जिम्मेदारियाँ हैं।

आप जानते ही हैं कि इस बीच श्रीयुत बिड़ला मेरे साथ ही थे और हमने खादी इत्यादि कई विषयोंपर बातचीत की है। मैंने उनको सुझाया था कि जहाँ भी खादीका स्टाक बहुत ज्यादा बढ़ जाये वहाँ सारी अतिरिक्त खादी उनको ले लेनी चाहिए जिससे उत्पादनमें कोई बाधा न पड़े। उन्होंने इस विचारको पसन्द किया और हो सकता है कि वे शुरूमें पूरी सावधानी रखते हुए तुरन्त ही कोई कदम उठायें भी।

उन्होंने मुझसे पूछा था कि यदि वे यह काम कलकत्तासे शुरू करें और भारत-भरकी सभी संस्थाओंसे खादी जमा करनेके लिए वहाँ एक खादी भण्डार खोलें तो आपको उसपर कोई आपत्ति तो नहीं होगी। मैंने उनसे कह दिया था कि उनकी बतलाई हुई परिस्थितियोंमें तो मुझे नहीं लगता कि आपको कोई आपत्ति होगी।

कीमतोंको समानरूप देनेके अपने मूल विचारको अमल में लानेकी बात मैं फिर सोच रहा हूँ। पर आप इस प्रस्तावपर विचार करें और यदि आपको कोई आपत्ति हो तो कृपया मुझे बतलायें।

महावीरप्रसादने श्रीयुत बिड़लाका नया भण्डार चलानेकी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनेका प्रस्ताव किया है। आप शायद इनको जानते हैं। वे बड़े ही उत्साही और ईमानदार कार्यकर्ता हैं और इन दिनों गोरखपुर में हैं। वे आज कलकत्ता रवाना हो रहे हैं। मैंने उनसे कहा है कि आपसे मिलकर सब बातोंके बारेमें बातचीत कर लें। उनके वहाँ पहुँचनेके चौबीस घण्टे बाद यह पत्र आपको मिल जायेगा।

आशा है कि आप और हेमप्रभा देवी दोनों ही इतने सारे कामके बावजूद बिलकुल चंगे होंगे।

हृदयसे आपका,

श्रीयुत सतीशचन्द्र दासगुप्त
खादी प्रतिष्ठान
सोदपुर

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १३७६२) की फोटो-नकलसे।