सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२१८

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

 

२११. पत्र : भगवानदासको

७ दिसम्बर, १९२८

प्रिय मित्र,

आपका पत्र मिला। मैं तो समझता हूँ कि समुचित उपचारसे आप अब भी अपने तपेदिकसे छुटकारा पा सकते हैं।

मैं 'नवजीवन' की एक प्रति आपको भेज रहा हूँ। यदि आप ग्राहक बनना चाहें, तो बन सकते हैं। आप अगर गुजराती पढ़ सकते हैं, तो गुजराती में क्यों नहीं लिखते?

हम यहाँ स्वतन्त्रता पानेके लिए यथासम्भव प्रयत्न कर रहे हैं।

हृदयसे आपका,

श्रीयुत भगवानदास
मारफत आस्ट्रेलिया-इंडिया लीग
सिडनी
न्यू साउथ वेल्स
आस्ट्रेलिया

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५०७३) की फोटो-नकलसे।

 

२१२. पत्र : कार्लो लुकारोको

७ दिसम्बर, १९२८

प्रिय मित्र,

आपके पत्रके लिए धन्यवाद। मुझे दुःख है कि आप अपने मनपर ऐसी छाप लेकर गये कि यहाँ आप मिलने आये तो मुझे कोई प्रसन्नता नहीं हुई थी। बात इतनी ही है कि आप मुलाकातियोंके लिए नियत समयके बाद आये थे और इसीलिए मैं आपको अधिक समय नहीं दे सका था।

हृदयसे आपका,

श्री कार्लो लुकारो
ताउरमिना
सिसली
इटली

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५०८७) की फोटो-नकलसे।