सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 38.pdf/२२०

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

 

२१५. पत्र : एच॰ एस॰ एल॰ पोलकको

७ दिसम्बर, १९२८

प्यारे भाई,

आपका पत्र मिला और मगनलाल स्मारकके लिए आपका चन्दा भी। समझमें नहीं आता कि अब आपको दूसरा कौन-सा काम सुझाऊँ, जिसे आप पूरे मनोयोगसे करें। अस्पृश्यता निवारणका काम तो है ही, फिर महिला संगठन और सामान्य राष्ट्रीय शिक्षाका काम भी है। गो-रक्षाके सिलसिले में चमड़ा पकानेका काम, हिन्दी प्रचार, कृषि सुधार, इत्यादि काम भी हैं। राजनीतिक गतिविधियों, जिनको पूरी तरह राज- नीतिक कहा जा सकता है, ऐसी गतिविधियोंके अलावा, ये सभी खर्चीले विभाग हैं। मेरे तई ये सभी रचनात्मक काम मेरे ठोस राजनीतिक कामके अभिन्न अंग हैं। दूसरे, अर्थात् ध्वंसात्मक किस्मके काम भी अत्यन्त उपयोगी और आवश्यक हैं, लेकिन उनमें मेरा सबसे कम समय जाता है।

लिओनके बारेमें आपकी बात पढ़कर आश्चर्य हुआ। वाल्डो और लिओन जब गर्भ में थे, उन दिनों मिलीका जीवन अत्यन्त संयमित और हर प्रकारकी उत्तेजनासे मुक्त था और दोनों बच्चोंका लालन-पालन भी बड़े ही स्वास्थ्यप्रद और स्वाभाविक वातावरणमें हुआ था। इसलिए वाल्डोकी अकाल मृत्यु और लिओनकी बीमारीकी बात मेरी तो समझ में नहीं आती। मेरा तो यहीं अनुमान है कि लन्दन शहरके अत्यन्त विषाक्त वातावरणने ही आपके बालकोंके इतने स्वस्थ शरीरोंको भी जर्जरित कर डाला है। मुझे इस बातकी प्रसन्नता है कि लिओन अपने रोगके सबसे गम्भीर दौरसे उबरनेमें समर्थ हुआ है। आशा है कि उसकी श्रवण शक्ति फिर पूरी तौरपर लौट आयेगी। काश, मैं लिओनको वकीलोंके कलम घिस्सू कामसे हटाकर खुली हवा में लाकर रख सकता!

ब्रिटिश गायनाके बारेमें आपकी सफलता से बड़ी खुशी हुई।

वेल्स देशके चरखेका नमूना मेरे प्राप्ति स्वीकारके समयतक यहाँ नहीं पहुँच पाया था। बाद में वह बिलकुल ठीक हालत में पहुँच गया। इसके लिए अनेक धन्यवाद। मेरे पास आश्रम में उस तरहका एक बड़ा-पूरा चरखा मौजूद है। किसी जर्मन मित्रने भेजा था।

बछड़ेवाली घटनासे मुझे बड़ी सीख मिली है और उतना ही मनोविनोद भी। उससे मेरा काम बहुत काफी बढ़ गया है, क्योंकि मुझे अहिंसाके विषयपर दर्जनों पत्र बल्कि निबन्ध पढ़ने पड़ते हैं। इनमेंसे अधिकांशके स्वर अहिंसात्मक न होकर हिंसात्मक ही होते हैं। मुझे तो याद नहीं पड़ता कि मैंने जो मत अब व्यक्त किया है, इससे भिन्न कोई मत मेरा कभी भी रहा है, हालाँकि इसे आज जितने स्पष्ट रूपसे समझ पा रहा हूँ, पहले कभी नहीं समझ पाया था। आपको शायद याद न