हो कि एक बार वेस्ट मेरे पास एक बिल्ली लाये थे। उसके सिरमें कीड़े पड़ चुके थे जिसके कारण उसे बड़ी यंत्रणा सहनी पड़ रही थी। मैंने तब भी वेस्टके इस सुझावका समर्थन ही किया था कि उसको पानी में डुबोकर उस बेचारीकी जीवनलीला समाप्त कर दी जाये। इसपर तुरन्त ही अमल किया गया था। आश्रममें भी मैंने मगनलालको पागल कुत्तोंको खतम कर देनेकी इजाजत दे दी थी।
हृदयसे आपका,
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५१०८) की फोटो-नकलसे।
२१६. पत्र : वी॰ जी॰ चैकॉफको[१]
सत्याग्रहाश्रम, साबरमती[२]
७ दिसम्बर, १९२८
आपका पत्र मिला। धन्यवाद। आपने इतनी अधिक शिष्टताके साथ जो आपत्तियाँ की हैं, उनके सम्बन्धमें मैं शीघ्र ही लिखनेकी सोच रहा हूँ। मैं उनका जो उत्तर तैयार करूँगा उससे यदि मैं आपको पूर्णतः सहमत न करा पाया तो भी आप कृपया मेरी इस बातपर विश्वास कर लीजिए कि जीवनके मेरे अपने तौर-तरीकेमें कार्य-साधकता-- इस शब्दका मैं जो अर्थ समझता हूँ--का कोई स्थान नहीं है। मैंने युद्धके सिलसिले में जो और जितना भी किया है वह इसी विश्वाससे किया है कि उस समय वैसा करना मेरा फर्ज था।
हृदयसे आपका,
- श्री वी॰ जी॰ चैकॉफ
- अध्यक्ष
- मास्को शाकाहारी संस्था
- उलित्जा उगारेवा १२
- मास्को ९, यू॰ एस॰ एस॰ आर॰
अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५१०९) की फोटो-नकलसे।